फिल्म समीक्षा: वक़्त (1965)

Waqt

क्यों कुछ ‘वक़्त’ परिवार के साथ समय की मह्त्वपूर्णता को दर्शाती इस फिल्म को देख कर व्यतीत किया जाए? रवि शंकर शर्मा के सदाबहार गीत ‘ऐ मेरी जोहराजबीं, तुझे मालूम नहीं’, ‘कौन आया कि निगाहों में चमक जाग उठी’ जैसे गीतों का लुत्फ़ उठाने के लिए ज़रूर देखें वक़्त.

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फिल्म समीक्षा: साहिब बीबी और ग़ुलाम

Sahib Biwi Aur Ghulam

ब्रिटिश राज में सामंतवाद के अंत, बेरोज़गारी के उत्थान और महिलाओं की स्थिति को दर्शाती 1962 में आई साहिब बीबी और ग़ुलाम हिन्दी सिनेमा की  कुछ उन चुंनिंदा फिल्मों में से है जिसकी महत्ता हर समय रहेगी.

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