फिल्म समीक्षा: दो आंखें बारह हाथ

मानवतावादी मनोविज्ञान पर आधारित निर्माता, निर्देशक और अभिनेता वी. शांताराम की महानतम फिल्म, दो आंखें बारह हाथ किसी क्रांति से कम नहीं थी.

प्रयोगमूलक यह फिल्म साल 1957 में रिलीज़ हुई थी. बर्लिन के अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में इस फिल्म को सिल्वर बियर पुरस्कार से नवाज़ा गया.

खुली जेल के परिक्षण पर बनी यह फिल्म जाहिर तौर पर एक सत्य घटना पर आधारित थी.

दो आंखें बारह हाथ कहानी थी जेल वार्डन आदिनाथ और छह बदमाश जेल कैदियों की. फिल्म नैतिकता के अनेकों मूल्यों पर प्रकाश डालती दिखी.

फिल्म में अहम किरदार निभाती दिखीं वी. शांताराम की पत्नी संध्या जिन पर फिल्म के अनेकों गीत फिल्माए गए. इन गीतों में से सबसे महत्वपूर्ण गीत था लता मंगेशकर द्वारा गाया हुआ गीत, ए मालिक तेरे बंदे हम.

यह गीत सिर्फ भारत में नहीं, पाकिस्तान में भी बेहद लोकप्रिय हुआ और स्कूलों में प्रार्थना गीत के रूप में गाया जाने लगा.

जब यह फिल्म बनी थी तब तक भारतीय सिनेमा जगत में रंगीन फिल्मों का सिलसिला शुरू हो चुका था. इसके बावजूद वी. शांताराम ने इस फिल्म को ब्लैक एंड वाइट बनाया ताकि फिल्म के तर्क को खूबसूरती से दर्शकों के सामने लाया जा सके.

हॉलीवुड के बहुचर्चित निर्देशक स्टीवन स्पीलबर्ग ने अपने 1993 की विख्यात फिल्म शिन्ड्लर्स लिस्ट में ऐसे ही ब्लैक एंड वाइट का प्रयोग किया किया था.

फिल्म के आखिर के अनुक्रम में वी. शांताराम को एक बैल के साथ भिड़ंत करनी थी. दृश्य को दर्शाते हुए वी. शांताराम बहुत बुरी तरह से घायल हो गए थे और लगभग अपनी आंखें गंवा बैठे थे.

लेकिन, वी. शांताराम इस हादसे से तो उभरे ही, उन्होंने दर्शकों के सामने एक महान फिल्म भी पेश की और उसे कामयाबी और सम्मान के सर्वोच्च शिखर पर विराजमान होते हुए भी देखा. 

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