अचिन्त्य बोस: हमारा वक़्त आ चुका है

ये बैले फिल्म में अचिन्त्य बोस और मनीष चौहान ने मुख्य भूमिका निभाई है. भारत बोलेगा ने बात की कलाकार अचिन्त्य बोस से जिन्हें उनकी डायरेक्टर सूनी तारापोरेवाला ‘स्टार बॉय’ कहती हैं.

अचिन्त्य बोस फ़िलहाल मुंबई में अपने ए लेवेल्स की पढ़ाई पूरी कर रहे हैं. वह सुबह-शाम अपनी ट्रेनिंग क्लासेज़ में व्यस्त रहते हैं.

लॉकडाउन के दौरान खाना पकाने, टिकटॉक वीडियो बनाने और वीडियो गेम्स खेलने के साथ-साथ, वह अपने पुराने दोस्तों से भी कनेक्ट कर रहे हैं. पेश हैं भारत बोलेगा से अचिन्त्य बोस की बातचीत के कुछ अंश.

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फिलहाल मेरा मकसद ए लेवेल्स की पढ़ाई पूरी करना एवं अच्छे डांस कॉलेज में दाखिला पाना है. साथ ही मैं अपने बचपन के सपने भी अपने साथ लिए चलता हूं—नॉर्वे जाना, बर्फीले पानी में गोते लगाना, हम्पबैक वेल्स और सार्डीन्स को फिल्म करना, और कैम्पफायर के पास बैठ कर नौर्दन लाइट्स देखना है. मुझे अत्यधिक मह्त्वकांक्षी ना समझें, पर अगले पांच सालों में मैं खुद को ऐसी ही किसी जगह देखना चाहता हूं, एक अच्छे डांस करियर के साथ.

ये बैले का सफ़र कैसे तय हुआ?

मैं डांसवर्क्स में ट्रेन करता था, जहां से आमिर और मनीष ने भी अपने गुरु येहूदा माओर से शिक्षा प्राप्त की. डांसवर्क्स की एक सालाना पेशकश होती है, जहां 2018 में मुझे फिल्म निर्देशक सूनी देखने आ रहीं थीं. कार्यक्रम के बाद सूनी ने कहा कि उन्हें मेरा स्टाइल काफी पसंद आया और सलाह दी कि मैं ऑडिशन के लिए जाऊं. मैंने वैसा ही किया.

स्टेज से सिनेमा का सफ़र कैसा रहा?

सब इतना अचानक और इतने आराम से हो गया कि खुद समझना या बयान कर पाना मुश्किल है. मेरी देखभाल करने वाले इतने सारे लोग थे कि मुझे पता भी नहीं चला कि यह शिफ्ट कब आ गया. इसका अंदाज़ मुझे हमारी फाइनल परफॉर्मेंस के दौरान हुआ, जब तक सूनी, सिंडी, विट्ठल सर, बीबॉय मौंक जैसे सभी लोग मुझे कितना दूर ले आए थे. शुरुआत में कोई दिक्कत नहीं महसूस हुई जब हमने दर्शकों के पॉइंट ऑफ़ व्यू से शूटिंग शुरू की. फिर विंग्स की बारी आई, और कुछ ही देर में हम दर्शकों से घिर चुके हुए थे. यह मुश्किल था, पर मज़ा बहुत आया. मनीष सीनियर डांसर हैं इसलिए मैं नहीं जानता कि उन्हें यह दिक्कत महसूस हुई कि नहीं, पर मैं काफी डरा हुआ था कि डांस के दौरान कहीं कैमरा को ही ना हिट कर दूं.  

अचिन्त्य बोस

ये बैले फ़िल्म सेट की कुछ ख़ास यादें?

यादें तो इतनी सारीं हैं कि उनमें से कोई एक चुनना मुश्किल है. हम सेट्स पर काफी टाइम पास किया करते थे. वैनिटी वैन में गाना बजाना हो, लूडो खेलना या फिर मस्ती मज़ाक करना—मज़े बहुत किए हमने. एक बार हम सब ने वैनिटी वैन में खूब पार्टी की और थक कर वहीं सो गए. जब जागे तो ऊट-पटांग तस्वीरें लीं साथ में. हमारा क्र्यू काफी चिल्ड-आउट रहता था. समीक्षा, अनन्या और अनुमति के साथ तो काफी हंसना बोलना रहता था.

ये बैले फ़िल्म का आपकी जिंदगी पर क्या प्रभाव पड़ा?

ये बैले फ़िल्म ने मुझे दो बहुत ही अहम बातें सिखाईं – धैर्य रखना और खुद पर अनावश्यक दबाव ना डालना. सेट पर हमें पता नहीं होता कि कौन किन परेशानियों से गुज़र रहा होता है. ऐसे में ज़रूरी है कि सब एक दूसरे का मनोबल बढ़ाते रहें. एक दिन जौफ्री के ऑडिशन टेप्स के शूटिंग के दौरान मुझसे लैंडिंग नहीं हो रही थी. मैं इतना घबरा गया कि रोने लगा. पर सबने मिलकर मुझे संभाला और मेरा प्रोत्साहन बढ़ाया. अंततः वह शॉट मेरी रोती हुई लाल आंखों के साथ ही लिया गया. 

सिनेमा का कलाकारों की ज़िंदगी पर क्या प्रभाव पड़ता है, खासकर मेल डांसर्स पर?

मैंने आजतक ऐसी कोई कला से जुड़ी फिल्म नहीं देखी जिसमें कलाकार के सपनों और चुनौतियों को ना दर्शाया गया हो. ये बैले फ़िल्म भी सारी मुश्किलों का सामना कर अपने सपनों को पूरा करने के सफ़र को दर्शाती है. यह आपको लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन—वह क्षमता जिससे आप जो चाहें उस पर ही ध्यान लगा कर उसे अपनी और आकर्षित कर पाएं—के बारे में सिखाती है. मेरे गुरु जैसन का कहना है कि डांस का कोई लिंग नहीं होता. हां, कई तरह के भेद-भाव ज़रूर होते हैं जिनसे हमें गुज़रते हैं पर यह सिलसिला तो चलता ही रहेगा. फिलहाल मुझे ऐसा लगता है कि अभी हमारा वक़्त आ चुका है.

अभी के भारत में बैले डांसिंग का क्या स्तर है, और आगे क्या संभावनाएं दिखती हैं?

यह एक उभरता हुआ डांस फॉर्म है. यह दुःख की बात है कि लोग क्लासिकल डांस स्टाइल्स के महत्व को नहीं समझ पाते. एक मज़बूत ढांचें के बिना कोई भी कमर्शियल सीखना नामुमकिन है. उसमें चोट लगने का भी खतरा बना रहता है. मुझे उम्मीद है कि ये बैले फ़िल्म से लोगों को इस प्रोसेस के बारे में जानकारी मिलेगी, और उनकी बैले में दिलचस्पी भी बढ़ेगी. भारत ऐसा देश है जहां ट्रेंड्स को बहुत जल्दी पकड़ा जाता है. आने वाले पांच सालों में मुझे उम्मीद है कि सिंगापूर और न्यू यॉर्क की तरह हमारे पास भी ऐसी बैले कंपनी होंगी, जो विश्व भर में भारत को प्रस्तुत करें.

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