पाताल लोक रोमांचक लेकिन गालियों से भरपूर

इन दिनों पाताल लोक की काफी चर्चा है जिसमें पुलिस, नेता, मीडिया और धर्म सभी को घसीटा गया है.

आजकल वेब सीरीज का ज़माना है और इन्हें खूब पसंद भी किया जा रहा है लेकिन इन वेब सीरीज पर सेंसर बोर्ड जैसा कोई नियंत्रण नहीं है और बनाने वाले इसे अपनी मर्जी से पेश कर रहे हैं.

पाताल लोक को काफी रोमांचक तरीके से पेश किया गया है और इसकी हर कड़ी बांधे रखती है.

इस सीरीज के प्रशंसक भी हैं और आलोचक भी. लेकिन इसका सबसे नकारात्मक पक्ष इसमें अश्लील गालियों की भरमार है जो हर दूसरे सीन में सुनाई देती है.

हर कोई गालियां देने में इतना उस्ताद है कि मानो गालियां उसने घोंट कर पी रखी हों.

हालात यह है कि सुलझे माने जाने वाले पत्रकार और उनके बॉस भी गालियां देने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहते.

पाताल लोक में पुलिस कार्यालय में जिस तरह गालियों का इस्तेमाल होता दिखाया गया है उससे तो आम आदमी पुलिस दफ्तर में जाने से और डरेगा.

इसमें हत्याएं वीभत्स तरीके से दिखाई गयी हैं, बलात्कार क्रूर है, मीडिया दोहरे चरित्र का है और धर्म जनमानस को सवाल उठाने के लिए मजबूर कर रहा है.

काफी साल पहले गोविंदा और करिश्मा कपूर की एक फिल्म खुद्दार आई थी जिसमें एक गाना था जिसमें करिश्मा गाती हैं ‘सेक्सी-सेक्सी मुझे लोग बोले’.

सेंसर बोर्ड ने इन शब्दों पर आपत्ति जताई थी और इन्हें बदलकर ‘बेबी-बेबी मुझे लोग बोलें’, करना पड़ा.

मिर्ज़ापुर से जो सिलसिला शुरू हुआ वह अब कहीं रुकता नहीं दिखता. नई सोच के नए निर्माताओं को ऐसा क्यों लगता है कि मार्केट बस नग्नता और गाली-गलौच का ही है.

चिंतक राजन प्रकाश कहते हैं, “मिर्ज़ापुर से जो सिलसिला शुरू हुआ वह अब कहीं रुकता नहीं दिखता. नई सोच के नए निर्माताओं को ऐसा क्यों लगता है कि मार्केट बस नग्नता और गाली-गलौच का ही है.”

आलटाइम ब्लॉकबस्टर शोले जब रिलीज़ हुई थी तो इसमें काफी हिंसा बताई गई थी. हाल में कई फिल्में आई हैं जिनमें गालियों का इस्तेमाल किया गया लेकिन पाताल लोक इन सबसे आगे निकल जाती है जिसकी हिंसा खौफनाक है, गालियां कानों को चीरती हैं और इस तरह की वेब सीरीज आप सिर्फ और सिर्फ अकेले देख सकते हैं.

पाताल लोक देखने के बाद सवाल उठता है कि सेंसर बोर्ड नाम की कोई चीज है क्या?

वेब सीरीज को सेंसर बोर्ड से बाहर क्यों रखा गया है, कौन इन सीरीज को मनमाने ढंग से पेश करने की अनुमति देता है और क्या ऐसी सीरीज सामाजिक ढांचे को रियलिटी के नाम पर गलत दिशा में नहीं ले जा रही हैं, यह सोचने की बात है…!

जब पाताल लोक में एक पुलिस अधिकारी अपने बेटे को स्कूल में पिस्तौल ले जाने के लिए प्रिंसिपल से माफ़ी मांगता है और घर में उसे पीटता है तो सीरीज में अश्लील गालियों, क्रूर हत्याओं और वीभत्स बलात्कार की जिम्मेदारी कौन लेगा.

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