फिल्म समीक्षा: गुड्डी

गुड्डी फिल्म एक मिसाल है हर उस शख्स के लिए जो फिल्मी जगत की चाह रखता है.

फिल्म निर्देशक हृषिकेश मुख़र्जी अपनी सरल और सहज फिल्मों के लिए विख्यात हैं. इनकी फिल्में बेहद ख़ूबसूरत तरीके से बड़ी सी बड़ी बात को सरलता से दर्शकों के सामने प्रस्तुत करती रही हैं. कभी मार्मिक, कभी गुदगुदाने वालीं, हृषिकेश मुख़र्जी की फिल्मों की हिंदी सिनेमा के इतिहास में ख़ास जगह है.

ऐसी ही एक फिल्म है सन 1971 में बनी गुड्डी. यह फिल्म अभिनेत्री जया भादुरी की पहली फिल्म थी और इस फिल्म के दौरान उनकी उम्र महज़ 23 वर्ष थी.

गुड्डी में जया भादुरी का साथ निभाते दिखे धर्मेंद्र, ए.के. हंगल, उत्पल दत्त और हिंदी सिनेमा के अनेक दिग्गज, जैसे राजेश खन्ना, नवीन निश्चल, असरानी, निम्मी, अमिताभ बच्चन, ओम प्रकाश और प्राण.

फिल्म की कहानी थी एक स्कूल में पढ़ने वाली किशोरी कुसुम, यानी कि गुड्डी की जो फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र से बेहद प्रेम करती है और फिल्मों में दिखाई देने वाली कहानियों को सच मान लेती है.

गुड्डी फिल्म उन लोगों को संबोधित थी जो फिल्मों को सच मान लेते हैं और अभिनेता अभिनेत्रियों की पूजा करने लगते हैं.

फिल्म के एक सीन में जब गुड्डी धर्मेंद्र को फिल्मों के मशहूर खलनायक प्राण साहब से हाथ मिलाता देखती है तो बहुत हैरान परेशान होती है और धर्मेंद्र को प्राण से सावधान रहने को कहती है.

तब धर्मेंद्र गुड्डी को परदे के आगे और परदे के पीछे का फर्क समझाते हैं.

फिल्में केवल बड़े परदे पर दिखने वाले अभिनेता अभिनेत्रियों से नहीं बनती, बल्कि फिल्म के पीछे बहुत से लोग होते हैं जो फिल्म को कामयाब बनाते हैं, जैसे तकनीशियन, सहायक, कैमरामैन, लाइट मन, आदि. इन्हें हम फिल्म देखते समय नहीं देख पाते.  

गुड्डी में जया बच्चन ने बेहद ख़ूबसूरत काम किया. उन्हें अपनी पहली ही फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए नामांकित भी किया गया.

यह जानना दिलचस्प है कि फिल्म गुड्डी में जया भादुरी के साथ अमिताभ बच्चन को मुख्य किरदार के लिए चुना गया था लेकिन निर्देशक को अनजान चेहरा चाहिए था इसलिए अमिताभ को बतौर हीरो हटा दिया गया था.

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