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नस्लवाद: आई स्टिल बिलीव इन दिस सिटी

racism poster
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न्यूयॉर्क शहर के मानवाधिकार आयोग की अध्यक्ष कैरमेलिन मैलेलिस के अनुसार हाल के वर्षों में एशियाई और प्रशांत द्वीपवासियों के ख़िलाफ़ नस्लवाद (racism) बढ़ा है. “हम सभी के पास पहले से ही इस पर कहानियां भरी पड़ी हैं, और महामारी के कारण पिछला साल विशेष रूप से ख़राब रहा है.”

कलाकार ऐमेण्डा फिंगबोधिपक्किया न्यूयॉर्क शहर के आसपास सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित छवियों और उनके द्वारा दिए गए संदेशों से दुनिया भर में सुर्खियां बटोर रही हैं

कैरमेलिन मैलेलिस बताती हैं कि न्यूयॉर्क और उसके बाहर, नस्लवाद के सभी रूपों के सन्दर्भ में एशियाई विरोधी घृणा के स्तर में बढ़ोत्तरी हुई है. “पिछले एक साल में ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ आंदोलन, काले-विरोधी, और अब एशियाई-विरोधी, यहूदी-विरोधी और ज़ेनोफ़ोबिया के अन्य रूपों के ख़िलाफ़ लड़ रहा है. यह एक बहुत ही विविध शहर है, और हम अपने सभी विभिन्न समुदायों के बीच एकजुटता देखना चाहते हैं.”

वह आगे कहती हैं, “हम अक्सर, नृशंस कृत्यों को देखकर मुंह मोड़ लेते हैं. लेकिन, दूसरों के लिए दरवाज़ा बंद करके, हम ख़ुद अपनी मानवता के लिए दरवाज़ा बन्द कर देते हैं. कला इसे वापस ला सकती है.”

“इसी क्षेत्र में बस स्टॉप, मैट्रो स्टेशनों और न्यूयॉर्क शहर में ऐतिहासिक इमारतों पर चमकीले रंग के पोस्टर, चित्र और डिस्प्ले बोर्ड लगाए गए हैं जो ‘आई स्टिल बिलीव इन दिस सिटी’ (इस शहर में अब भी मेरा विश्वास है) नामक एक परियोजना का हिस्सा हैं, जिसमें ऐमैण्डा फिंगबोधिपक्किया की कृतियां दर्शाई गई हैं.”

एटलांटा में थाई और इण्डोनेशियाई आप्रवासियों के घर पैदा हुईं, अमेरिकी न्यूरो – साइंटिस्ट से कलाकार बनीं ऐमैण्डा फिंगबोधिपक्किया लंबे समय से कला की दुनिया में एक जाना-माना नाम हैं.

नारीवाद, विज्ञान और समुदाय पर उनके चित्र बहुत मशहूर होते हैं, व विरोध प्रदर्शनों और रैलियों के साथ-साथ इमारतों और राजमार्गी सुरंगों पर भी देखे जा सकते हैं.

कोविड-19 महामारी शुरू होने के बाद से ही एशियाई विरोधी घृणा में वृद्धि पर उनकी कलात्मक अभिव्यक्ति ने उन्हें बहुत व्यापक पहचान दी: “आई स्टिल बिलीव इन दिस सिटी” को कई प्रमुख मीडिया संगठनों ने जगह दी है, जिसमें प्रसिद्ध टाइम पत्रिका का एक ऐसा मुखपृष्ठ भी शामिल है जिसमें एशियाई-अमेरिकियों के प्रति क्रोध और हिंसा के बारे में एक नई जागरूकता को दर्शाता है.

ऐमैण्डा फिंगबोधिपक्किया का कहना है कि पोस्टर और भित्ति चित्रों में “हमारे समुदाय के ख़िलाफ़ इन भयानक हमलों का सामना करने के लिए, लचीले, आशावादी अभिभावक” का प्रतिनिधित्व दिखता है. वे हमारा उत्थान करते हैं, हमें सुरक्षित रखते हैं, हमें अपने अधिकारों के लिए खड़े होने हेतु प्रोत्साहित करते हैं.


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