मनाली-शिलॉंग: धरती का स्वर्ग देखें या अपना स्कॉटलैंड

नई पीढ़ी का मजाक बनाते वक्त अक्सर यह कहा जाता है कि यह पीढ़ी तो इतनी परेशान है कि इन्हें एयर कंडीशनर भी चाहिए और कंबल भी. इस तर्क को देखें तो अक्सर लोगों में यह प्रवृत्ति भी देखी जाती है कि गर्मियों में वे ठंडी जगहों पर जाना चाहते हैं, और सर्दियों में गर्म जगहों पर.

इस चुनाव से किसी को कोई दिक्कत नहीं है, पर कहीं ऐसा करते हुए आप कुछ बेहतरीन जगह और कीमती समय गलत जगह तो नहीं गवां रहे?

यदि आपने अपनी ज़िन्दगी का ज़्यादातर वक्त उत्तरी मैदानों या दक्षिणी इलाकों में बिताया है तो संभावना है कि बर्फ के प्रति आपका आकर्षण बरकरार होगा.

बर्फीले पहाड़ों पर स्नोमैन बनाने और बर्फ के गोलों से खेलने का समय अब जो गवांया, तो पूरे साल दोबारा भारत में यह मिलना ज़रा मुश्किल होगा.

साथ ही यह ख्याल भी रखना आवश्यक है कि एकदम से हुए तापमान परिवर्तन की वजह से आपके शरीर को कोई नुकसान न हो. इसलिए आइये उन दो जगहों की बात करते हैं जहां आप स्नो का आनंद लेने के साथ-साथ अन्य नज़ारे, एडवेंचर स्पोर्ट्स और सांस्कृतिक उत्सवों का भी लुत्फ़ उठा सकें.

मनाली
भारत का हनीमून कैपिटल मानी जाने वाली मनाली हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित है. सेब के पेड़, बर्फ से ढके रास्ते, खूबसूरत राजसी पहाड़ियां और घने जंगल एक लंबे अरसे से पर्यटकों का दिल जीतते आए हैं. शहर के बीचों बीच बहती व्यास नदी एक आकर्षक और मनमोहक परिदृश्य है.

किसी भी मौसम बर्फ का आनंद लेना हो तो रोहतांग पास जा सकते हैं, परंतु निसंदेह दिसंबर-जनवरी के महीनों में यहां की बात ही कुछ और होगी. यदि मनाली जाएं तो, रोहतांग पास और सोलांग वैली, इन दोनों जगह जाना एकदम जरूरी है.

यहां एडवेंचर प्रेमियों के लिए बहुत सारे विकल्प हैं, जैसे ट्रैकिंग, पैराग्लाइडिंग, स्कीइंग, ज़ोरबिंग, वाईट वाटर राफ्टिंग.

भरपूर आनंद लेने के लिए ज़रूरी होगा कि आप कम से कम चार-पांच दिन का वेकेशन प्लान करें. रोहतांग पास आने जाने, वहां के लिए खास पोशाकें लेने, खाने पीने और ढेर सारी मस्ती करने में पूरा एक दिन मान कर चलें.

सोलांग वैली में आप कितने स्पोर्ट्स करते हैं, या कितना समय बिताते हैं, यह आपकी इच्छा पर निर्भर करता है, पर यहां भी दिन का काफी समय लग ही जाता है. ट्रिप के बाकी दिनों में आप तय कर सकते हैं कि कितना समय मंदिरों, घाटियों, एवं खरीदारी में बिताएंगे.

यहां का मौसम सर्दियों में प्रबल रूप से ठंडा (-15°सी से 05°सी) और गर्मियों में हल्का ठंडा (4°सी से 15°सी) रहता है.

नवंबर से जुलाई के बीच वर्षा एवं बर्फबारी भी होती रहती है. इस क्षेत्र में हिमपात जनवरी या शुरूआती फरवरी में अनुभव किए जा सकते हैं.

यदि दिल्ली से सड़क के रास्ते यात्रा कर रहें हों, तो एनएच एक आपको अंबाला तक पहुंचाएगा. वहां से एनएच 22 चंडीगढ़ तक, और अंततः एनएच 21 मनाली की ओर ले जाएगा.

रेल से मनाली पहुंचना थोड़ा आसान नहीं है, क्योंकि सबसे पास के रेलवे स्टेशन भी कम से कम 250 किमी दूर हैं. भुंतर हवाई अड्डा मनाली के सबसे करीब है (50 किमी), जिसे कुल्लू-मनाली हवाईअड्डे के नाम से भी जाना जाता है.  

 
शिलॉंग
भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य मेघालय की राजधानी शिलॉंग एक छोटा-सा शहर है, जिसे पैदल घूमकर भी देखा जा सकता है. अपनी सुविधानुसार सिटी बस या दिनभर के लिए ऑटो या टैक्सी भी किराए पर ले सकते हैं.

शिलॉंग और उसके आसपास के दर्शनीय स्थलों की वैसे तो कोई गिनती नहीं है, परंतु अपनी आईटीनेरी तैयार करने से पहले हर जगह की जानकारी होना आवश्यक है.

सर्दियों में शिलॉंग बेहद खूबसूरत तो होता है, पर कुछ जगहें (जैसे की चेरापूंजी) अपने सर्वोत्तम रूप में नहीं होती.

बेहतरीन नज़ारे और मौसम का ज्यादा से ज्यादा लुत्फ़ उठाने के लिए आप यहां कम से कम एक हफ्ते की ट्रिप अवश्य प्लान करें.

यह जगह 12 से 20 डिग्री तक के सुखद तापमान के साथ दिसंबर में स्वर्गीय हो जाती है. द्वाकी में अनमॉट नदी का पानी इतना स्पष्ट है कि उस पर तैरने वाली नाव ऐसा लगता है कि मध्य हवा में उड़ रही हो. नदी के निकट स्थित यहां की मिठाइयां और रसदार संतरे सभी बहुत पसंद करते हैं.

1965 मीटर पर स्थित, शिलॉंग पीक, यहां का सबसे ऊंचा प्वाइंट है, जहां से पूरे शहर का विहंगम नजारा देखा जा सकता है. फूल पौधों का शौक हो तो लेडी हैदरी पार्क ज़रूर जाएं. असंख्य प्रकार के फूलों के साथ साथ यहां एक छोटा चिड़ियाघर और अनेक प्रजातियों की तितलियों का संग्रहालय भी है.

इसके अलावा कैलांग रॉक और घने जंगलों से घिरी वार्डस झील मिस ना करें. शिलॉंग से 20 किमी दूर स्थित उमियाम झील में कई प्रकार के वाटर स्पोर्ट्स का आनंद लिया जा सकता है. 

दुवान सिंग सैयम ब्रिज वायर रोप (तार की रस्सी) से बना है जो शिलॉंग और चेरापुंजी के रास्ते के ठीक मध्य मे है. नवंबर-दिसंबर के महीने में जब कोहरा होता है, तब लोग यहां आना पसंद करते हैं क्योंकि तब चेरापुंजी जाना संभव नहीं होता. नोहकालिकाई फाल्स, सेवन सिस्टर फाल्स, मोस्वाई केव, किसी प्राकृतिक खजाने से कम नहीं. 

शिलॉंग में खरीददारी करने के लिए प्रमुख स्थान पुलिस बाजार, बारा बाजार और लैटूमुखराह है. यहां आपको हाथ की बुनी हुई विभिन्न आकारों की सुंदर टोकरियां, हाथ से बुनी हुई शॉल, हस्तशिल्प,संतरी शहद और केन वर्क की कारीगरी देखने को मिलेगी. कुछ खास खरीदारी के लिए आप खादी ग्रामोद्योग और पुरबाश्री भी जा सकते हैं.

दिसंबर में शिलॉंग घूमना एक बहुत अच्छा विकल्प इसलिए भी है क्योंकि इस वक्त यहां अनेक फेस्टिवल्स चल रहे होते हैं, जैसे त्यसिम फेस्टिवल, पिन्जेरा फेस्टिवल और तुरा विंटर फेस्टिवल.

शिलॉंग से 40 किलोमीटर की दूरी पर उमरोई में शिलॉंग हवाई अड्डा है, जहां के लिए कोलकाता और गुवाहाटी से सीधी उड़ानें हैं. मेघालय में रेल लाइनें नहीं है. गुवाहाटी यहां का निकटतम रेलवे स्टेशन है, जो शिलॉंग से 104 किमी, यानी लगभग साढ़े तीन घंटे की दूरी पर स्थित है. 

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