कुमाउं के पहाड़ आपको अपना बना लेंगे

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हिमालय की शरण में शांति  

कुमाउं की पहाड़ियां आपको अभिभूत नहीं करेंगी, इन पहाड़ियों की दूर-दूर तक फैली विशाल भव्यता आपको डराएंगी भी नहीं. इन पहाड़ियों की सुंदरता, नैसर्गिकता से आपको कोई खतरा भी नहीं होना चाहिए.

कुमाउं की पहाड़ियां आपके अंदर उसी तरह जोश और खुशियों का संचार करेंगी जैसा कभी आप अपने घर की घुमावदार गलियों में छोड़ कर आ चुके हैं.

यकीन मानिए एक बार कुमाउं की पहाड़ियों पर आने के बाद आपको यहां की वादी से इश्क हो जाएगा और आप यहां हमेशा-हमेशा के लिए रहना पसंद करने लगेंगे, छोड़ कर जाने का मन ही नहीं करेगा.

पहाड़ी जीवन के पुराने किस्से कहानी, पहाड़ियों के नीचे उतरते सूरज के साथ चारों तरफ बिखरे रंगों के कोलाहल और रात में घर के दरवाजे- खिड़कियों के नजदीक आए टिमटिमाते सितारे, पुकारते बादल के टुकड़े आपको यहां एक दूसरी ही दुनिया की सैर कराते नजर आएंगे.

बिल्कुल नैसर्गिक और प्रकृति से बतियाती दुनिया. पहाड़ पर अवतरित होते स्वर्ग से सीधा साक्षात्कार. कुमाउं की पहाड़ियों में जादू है और इसकी जिंदादिली आपको यहां से कभी लौटने नहीं देगी.

चांफी नदी के सानिध्य में

हमारी यात्रा का दूसरा पड़ाव इंद्रधनुष की सतरंगी रंगों से चमकीला सफर था. पहाड़ी रास्ते के चट्टानी ओर पथरीले रास्ते के मीलों-मील सफर के बाद हमलोग एक खिलखिलाती नदी गोला के तट पर पहुंचे. तेज खिलखिलाती धूप, गोला नदी के कलकल करते पानी पर चमकते सितारे, कोलाहल करते झड़ने और चिड़ियों की चहचहाहट ने मन मोह लिया.

हम नदी के जिस किनारे में ठहरे थे चारों ओर खेतों की हरियाली, खेतों में ताजे गाजर-मूली, प्याज और गोभी के पौधे. नदी के दूसरी ओर ऊंची ढ़लावदार चट्टानों की मेहराब. लेकिन नदी की सौम्यता और कलकल करती आवाज दोनों किनारों को एक संगीतमय लय से बांधने का काम कर रही थीं.

इतना ही नहीं, हम लोंगों ने वहां जीवन में पहली बार काले रंग का एओनियम का फूल देखा और वहीं बुलबुल को गाते सुना. यह सब मेरे जीवन में पहली बार मेरी आंखो-कानों के सामने घटित हो रहा था.

अभिभूत थे हमलोग. बच्चों ने पत्थर और चट्टानों पर अपने नाम लिखे, नाम खुदवाए ताकि हमारी याद इन वादियों में हमेशा गूंजती रहे.

नदिया पड़ाव

जिम कॉर्बेट पार्क के साहसिक किस्से सुन कर हम पले-बढ़े हैं. कोलकाता के हमारे घर में अभी भी जिम कॉर्बेट पार्क की स्पेशल बस रखी हुई है.

बचपन में मेरे पापा हमें बाघ के नाम से डराते थे और कहते थे, सो जाओ देखो कैसे अंधेरे में कॉर्बेट टाइगर की दो चमकीली आंखें नजर आ रही हैं.

लेकिन हमने कभी सोचा नहीं था कि हम जिम कॉर्बेट पार्क देखने जाएंगे. हम जैसे ही कॉर्बेट नेशनल पार्क पहुंचे वहां की आबोहवा में हमें सर्वशक्तिशाली टाइगर की भयावहता दिखने लगी. उनकी चमकीली आंखे नजर आने लगीं.

वहां के जंगल की खुश्बू और सौंदर्यता हमारा मन मोहने लगीं. हमारे घर की बॉलकनी से जंगल का विस्तार दिख रहा था. पेड़ों और लकड़ियों की सुगंध हमारी नाकों के अंदर घुस रही थीं.

कार्बेट पार्क के अंदर जाते ही आप यह भूल जाएंगे कि आप यहां क्यों आए हैं. यहां का लैंडस्कैप हर 50 मीटर की दूरी पर बदल जाता है.

कभी घने जंगल तो कभी चट्टानों वाली नदियां तो कभी लंबे-लंबे आकाश छूते ओक ट्री की फैली चारों ओर हरियाली. ये ओक ट्री कुछ अजीब ही दिखते हैं, इन लंबे पेड़ों की वजह से जंगल में कभी तेज चटख धूप आती थी तो कभी चारों और घुप्प अंधेरा.

पता ही नहीं चलता था कि दिन है या रात. ओक ट्री के घने झुरमुटों के पीछे छिपे हाथी के नुकीले दांत भी हमने देखे. झुरमुटों के बीच शान से पत्तियों को चबा रहे हाथी हमारा स्वागत जंगल में शान से कर रहे थे.

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