सौन्दर्य की धरा का नाम है कश्मीर

Beautiness of Kashmir

बचपन में जब आप अपनी मां के आंचल में छुप कर, परियों की कहानी सुन कर सोते हैं और मीठी नींद के किसी ख्वाब में एक ऐसी खूबसूरत जगह पहुंच जाते हैं जो आपके मन के अनुरूप हर क्षण बदलती है और हर बार आपको अपनी खूबसूरती से एक अद्भुत आश्चर्य से भर देती है, ऐसी अद्भुत स्वप्निल सौन्दर्य की धरा का नाम है कश्मीर.

श्रीनगर के हृदय की हलचल आप डल झील के रूप में महसूस कर सकते है. यह झील दर्पण है पूरे श्रीनगर का और यह दर्पण श्रीनगर को उसकी ख़ूबसूरती का निरंतर अहसास कराता रहा है.  

dal lake

श्रीनगर तक पहुंचने के लिए आप जम्मू से बस, टैक्सी या हवाई जहाज की सुविधा ले सकते हैं. मैं यहां दिल्ली से हवाई यात्रा करके पहुंची. एयरपोर्ट पर कोई याकूब भाई आपको लेने तख्ती पर आपका नाम लिए मुस्कुराहट के साथ खड़े आपका इंतज़ार कर रहे होते हैं.

डल झील के किनारे पर आंखों के लिए झील की खूबसूरती किसी चमकते हीरों के ढेर की तरह दिखाई देती है, जिसकी न तो कभी इन आंखों ने कल्पना की थी और न ही कोई तैयारी.

गाड़ी रूकती है और सामने कोई वसीम भाई शिकारे पर बिठा कर ले जाते हैं किसी बेग साहब की अंग्रेजी नाम वाली बहुत पुरानी किंतु बेहतरीन हाउसबोट पर. वहां पहुंचते ही कश्मीर का मौसम अपना मिज़ाज रंगीन कर लेता है और शायद यही कारण है कि कश्मीर हमारे फिल्म जगत का सबसे प्रिय लोकेशन रहा है.

यूं तो यहां की शांति को छोड़ कर कहीं भी जाने का दिल नहीं चाहता किंतु हम इसे अपने साथ ले जाने का तय कर फिर पहुंच जाते हैं शिकारे की सैर पर जो अद्भुत है, जहां नाविक के गीत की मीठी धुन घुल जाती है डल की हर एक लहर में. यहां पानी की सतह पर तैरते शिकारे देखना किसी ध्यान साधना से कम नहीं. डल झील पर आपको रोज़मर्रा के बाजार का भी अनुभव लेने को मिलेगा.

शाम ढ़लती है झील की पलकों में और हम रात का सिरा पकड़े पहुंच जाते हैं हाउसबोट पर जो भीतर से शाही अंदाज़ में सजी होती है. सर्द रात में खाने के बाद कुछ देर हाउसबोट के डेक पर बिताकर झील को आधुनिक रंगों में देखने का आनंद उठा अपने कमरे में जा कर सो जाते हैं.

यूं तो हर मौसम में कश्मीर की अपनी अलग खूबसूरती है लेकिन अप्रैल से लेकर जून तक जब भारत के अधिकतर राज्य गर्मी से झुलस रहे होते हैं तो कश्मीर का मौसम अपने पूरे खुमार में होता है जिसका सर्वप्रथम स्वागत करते हैं ट्यूलिप के फूल जो कश्मीर की जमीन को प्यार के हर एक रंग से भर देते हैं.

सुबह उठते ही पहलगांव की तैयारी, जो श्रीनगर से तक़रीबन 93 किलोमीटर है, लगभग तीन घंटों का हसीन सफ़र जो सूफी संगीत के साथ और भी हसीन लगता है. बर्फ से ढंके ऊंचे पहाड़, सड़क के एक किनारे पर बहती निरंतर नदी, बादलों के साथ इश्क लड़ाते ऊंचे ऊंचे देवदार, पाइन और चिनार के पेड़ और सेब, केसर, बादाम और अखरोट के बगीचे अपनी खूबसूरती के आगे बेशकीमती वस्तुओं को भी मिट्टी बना दें.

‘पहल’ मतलब भेड़-बकरी चराने वाले गुर्जर प्रजाति के लोग और उनका यह ‘गांव’ जहां पहुंचते ही एक होटल में चेक इन कर हम बिना समय गवाएं ढूढ़ लेते हैं घोड़े जो तय कीमत पर हमें बायसरन यानी मिनी स्विट्ज़रलैंड तक अपने ऊपर बिठा कर ले जाएंगे. बादल, राजू और सिकंदर नाम के घोड़े निकल जाते हैं अपनी मदमस्त चाल में हमें ऊबड़ खाबड़ रास्ते से एक ऐसी जगह पहुंचाने जिसे आप प्रकृति का गलीचा कह सकते हैं.

पूरे रास्ते रिमझिम बारिश के साथ सफ़र तय कर हम बायसरन पहुंचते हैं जहां मौसम की सबसे सुनहरी धूप हमारा इंतज़ार कर रही होती हैं. बर्फ के पहाड़ों के बीच बसी घाटी के चटख हरे गलीचे पर या तो निरंकुश भागने का दिल चाहता और फिर थक कर इसी की आगोश में बिन कुछ कहे घंटो लेट जाने का. मैंने दोनों ही किया. भूख लगने पर यहां आपको चाय के साथ गर्म पकोड़े, कश्मीरी कहवा, नूडल्स, राजमा चावल बहुत ही सुलभता से मिल जाएंगे.  

कुछ समय यहां गुजारने के बाद वापस लौट कर कुछ देर आराम कर हम निकल जाते हैं पहलगांव को और करीब से जानने के लिए, वहां के लोगो से मिलने के लिए. पूरे कश्मीर के लोगों में एक बात सामान्य रूप से देखने मिलती है – उनके चेहरे की मुस्कुराहट और उनकी मीठी बोली और मेजबानी.

Lidder river in kashmir

सड़क के किनारे बह रही लिद्दर नदी की आवाज़ में खुद की आवाज़ को खो कर प्रकृति की भव्यता का भान हो जाता है. सुनहरी संध्या की सर्द लकीर पर चल कर होटल पहुंचकर कश्मीरी पुलाव का स्वाद लेते हैं. कश्मीरी भोजन में यूं तो मांसाहारी जायकों की भरमार है पर शाकाहारी लोगों के लिए भी यहां खासे विकल्प उपलब्ध हैं. खड़े मसाले, सूखा मेवा और केसर किसी भी प्रकार के भोजन को जायके से भर देता है.

अगले दिन हम यहां की ही एक गाड़ी लेकर निकल जाते हैं घाटियों के कुछ और रंग देखने. ड्राईवर और गाइड जाहिद भाई से पता लगता है कि केवल पहलगांव में ही 150 दर्शनीय स्थल हैं. कुछ जगहों पर पहुचते हैं, आरू घटी, बेताब घटी और चन्दनवाड़ी, सबकी अपनी अलग ख़ूबसूरती. हम तस्वीरें खीचते हैं और अचानक कैमरा बंद करके रख देते है क्योंकि कोई भी तस्वीर इस दृश्य जितनी खूबसूरत नहीं. ठगा सा महसूस होता है हर तस्वीर पर.

पहलगांव में आप वाटर स्पोर्ट का भी मज़ा ले सकते हैं. अपने जीवन में साहस के खेलों को स्थान देने वाले लोगों के लिए यह स्थान किसी वरदान से कम नहीं. अगले दिन गंदेरबल जिले में बसे सोने के मैदान कहलाने वाली तहसील सोनमर्ग की यात्रा प्रारंभ हुई जो श्रीनगर से लगभग 54 कि.मी. चलने पर पूरी हो गई.

पर्यटन को कश्मीर का सबसे बड़ा व्यवसाय कहें तो गलत नहीं होगा. प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या में देशी और विदेशी लोग कश्मीर की वादियों में अपने आप को नया सा करने जाते हैं. ख़बरों में यहां तनाव की स्थितियां भी बताई जाती हैं किंतु कश्मीर तो बस इश्क के लिए है.

बर्फ के ऊंचे पहाड़ों के बीच से निकलती हुई सिंध नदी बर्फ की श्वेत आभा लिए बहती है. ताज़ा बर्फ़बारी से ढंके बेदाग़ पहाड़ों पर लगे भोजपत्र के पेड़ भारत के तपस्वियों के ज्ञान की धरोहर को अपनी छाल में आज भी सहेज कर रखे हुए हैं. सोनमर्ग में ही थाजिवास ग्लेशियर को देखने का आनंद घुड़सवारी के ज़रिये उठाया जा सकता है. सोनमर्ग में आप स्लेज का भरपूर आनंद उठा सकते हैं.      

कश्मीर में अब हम श्रीनगर से लगभग 70 कि.मी. दूर पहुंच जाते हैं बसे बारामुला जिले की गुलमर्ग तहसील में जिसके घुमावदार पहाड़ी रास्तों पर अनेक रंग के फूल अपने आप खिल जाते हैं और यही देख कर सुल्तान युसूफ शाह ने इसका नाम गुलमर्ग रखा.

गुलमर्ग विश्व का सबसे प्रसिद्द स्कींग स्थल है. यहां बर्फ से जुड़ा लगभग हर तरह का खेल खेला जाता है. बर्फ की मोटी चादर पर पहुंचने के लिए आपको गंडोला का सहारा लेना होता है जिसके लिए टिकट पहले से रोक लेने पर ऑनलाइन मिल जाते हैं. यहां भी आपको खाने पीने की संपूर्ण व्यवस्था मिल जाती है.

Beauti of Kashmir

कश्मीर का ह्रदय उस पर जमी बर्फ की तरह स्वच्छ है. इस प्रेम और सौन्दर्य की धरती को ह्रदय के स्तर पर छोड़ पाना असंभव है. कश्मीर में रहकर आपको प्रकृति के सौन्दर्य का उत्कृष्ट रूप देखने मिलता है वह भी बिन किसी मिलावट के. यहां लकड़ी, कपड़े, कालीन पेपर मेशी की कारीगरी के अद्भुत नमूने देखने मिलते हैं जो पीढ़ी दर पीढ़ी चले आ रहे हैं.

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