रज़िया सुल्तान की कब्र में छेद

रज़िया सुल्तान वो नाम है जिसे भारत क्या पूरी दुनिया जानती है. वो हमारे देश की हीं नही बल्कि पूरी दुनिया की पहली महिला शासक थीं.

रज़िया सुल्तान की कब्र दिल्ली के नई सड़क इलाके में सीताराम चौक पर स्थित है. वहां तक पहुंचने के लिए बहुत ही तंग गलियों से गुजरना होता है.

इसके बाद मुख्य द्वार के अंदर प्रवेश करने पर दो कब्र दिखती हैं, जिनमें एक तो रज़िया की है जबकि दूसरी कब्र अज्ञात है. स्थानीय नागरिक बताते हैं कि दूसरी कब्र सुल्तान की बहन शाज़िया की हो सकती है.

इन कब्रों की हालत बद-से-बदतर हो चुकी है 

रजिया सुल्तान की कब्र में ही दो सुराख हो चुके हैं. ताज्जुब  है कि इन पर ध्यान देनेवाला कोई नहीं है. पुरातत्व विभाग के लोग शायद ही कभी भूले-भटके आते हैं. मरम्मत के नाम पर कुछ नहीं किया जाता.

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कुछ लोगों ने जब पुरातत्व विभाग से खुद ही मरम्मत करने की अनुमति मांगी तो उन्हें निराशा हाथ लगी. चूंकि कब्र पुरातत्व विभाग के द्वारा संरक्षित है अतः सरकारी पहल के अलावा कोई व्यक्तिगत उत्साह नहीं दिखाया जा सकता.

पुरातत्व विभाग द्वारा विकास के नाम पर सिर्फ एक फाइबर शेड बनवा दिया गया है और दो स्ट्रीट लाइट लगवा दी गई है. इसी शेड के नीचे लोग नमाज अदा करते हैं. लोगों का कहना है कि शेड अगर पक्की बनवा दी जाए तो बेहतर होगा.

रज़िया की मजार पर विदेशी सैलानी भी आते-जाते रहते हैं. इसके बावजूद इस जगह का विकास नहीं किया गया है.

चार सिलिंग फैन, दो कूलर, एक स्टैंड फैन, तीन सी.एफ.एल बल्ब, दो ट्युब लाइट, एक एक्जॉस्ट फैन, पानी की दो टंकियां लगी है, जिसके सहारे सात नल लगे हुए हैं. एक गिजर भी है लेकिन वो खराब है. साथ ही एक जग है जिसमें पीने का पानी रखा होता है. ये सारी चीजें स्थानीय लोगों नें खुद से व्यवस्थित की हैं.

एक स्टोर रूम भी है, जिसमें इमाम अपना सामान रखते हैं. यहां एक बहुत ही खास तरीके का कैलेंडर टंगा है जिसमें ग्यारह घड़ियां बनी हुई है. इस कैलेंडर को औकात-ए-नमाज कहा जाता है. इसकी मदद से लोग समय और तारीख़ पता करते हैं.

इस कब्र पर लगभग 17 साल पहले से नमाज अदा की जा रही है. और 10 साल पहले से यहां नमाजियों की संख्या में वृद्धि भी हुई है.

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