कोच के लिए इतने ड्रामे की क्या जरूरत थी

भारतीय टीम के नए कोच के लिए प्रक्रिया एक ऐसी स्क्रिप्ट की तरह थी जिसमें पटकथा लिखी जा चुकी थी. मुख्य किरदार को मालूम था कि उसे कौन सा रोल मिलने जा रहा है, नाटकीयता के लिए कुछ चेहरे बदलने पड़े और नए चेहरे लाए गए लेकिन अंत में परिणाम वही हुआ जो जनता जानती थी.

विश्व कप के सेमीफाइनल में भारतीय टीम की सेमीफाइनल में हार के बाद एक बार तो लग रहा था कि रवि शास्त्री को कोच पद से हाथ धोना पड़ेगा लेकिन वेस्ट इंडीज दौरे पर रवाना होने से पहले कप्तान विराट कोहली ने जब
संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यदि रवि भाई कोच बने रहते हैं तो उन्हें ख़ुशी होगी, तो यह उसी समय स्पष्ट हो गया था कि शास्त्री ही कोच बने रहेंगे फिर चाहे कितने ही उम्मीदवार होड़ में क्यों न हों.

बीसीसीआई ने मुख्य कोच और अन्य पदों के लिए आवेदन मंगवाए जबकि बीसीसीआई को भी यह आभास था कि शास्त्री को कोच पद से हटाना मुश्किल होगा क्योंकि उन्हें कप्तान का पूरा समर्थन हासिल है.

इसी बीच हितों के टकराव का मामला उठा और कोच नियुक्त करने के लिए बनी तीन सदस्यीय समिति के तीन लीजेंड सदस्य सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण एक-एक करके हितों के टकराव के आरोपों के चलते समिति को छोड़ गए.

बीसीसीआई का संचालन देख रही प्रशासकों की समिति ने कपिल देव की अगुवाई में तीन सदस्यीय समिति नियुक्त की जिसके दो अन्य सदस्य पूर्व ओपनर अंशुमन गायकवाड और पूर्व महिला क्रिकेटर शांता रंगास्वामी थे. इस समिति ने मुंबई में बीसीसीआई के मुख्यालय में पांच उम्मीदवारों का साक्षात्कार लिया और शास्त्री को फिर से कोच नियुक्त करने का फैसला किया.

अब सवाल यह उठता है कि शास्त्री को ही कोच चुना जाना था तो इतनी लंबी चौड़ी कवायद करने की क्या जरूरत थी. विराट कोच के लिए शास्त्री को चाहते थे, टीम को भी शास्त्री पसंद थे, तो फिर यह ड्रामा क्यों रचा गया.

सोशल मीडिया पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब शास्त्री ही चुने जाने थे तो फिर यह आवेदन, शॉर्टलिस्टिंग, चयन प्रक्रिया और साक्षात्कार क्यों.

भारतीय टीम विश्व कप के सेमीफाइनल में हारी थी और इसे छोड़ दिया जाए तो शास्त्री की कोच के रूप में तमाम उपलब्धियां उन्हें कोच बनाये रखने के लिए पर्याप्त थीं. उन्हें विंडीज टूर से ही कोच रखा जा सकता था क्योंकि इस समय वह भारतीय टीम को समझने के लिए सबसे बेहतर व्यक्ति हैं.

खैर अब शास्त्री फिर से टीम के कोच बन गए हैं लेकिन यह सवाल बना रहेगा कि जब एक व्यक्ति सक्षम है तो नया ढूंढने के चक्कर में संसाधनों और समय की बर्बादी क्यों.

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