प्रेम अदीब: उस ज़माने के राम

महात्मा गांधी ने अपने पूरे जीवन में जो एकमात्र फिल्म देखी, वो थी प्रेम अदीब की ‘राम राज्य’. फिर कौन थे, प्रेम अदीब? इनका जन्म 10 अगस्त, 1916 को सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ था. इनके पिता पंडित राम प्रसाद वकालत करते थे. प्रारंभिक शिक्षा तो सुल्तानपुर व जोधपुर में हुई, लेकिन इनकी रूचि अभिनय करने की थी. फिर क्या था, ये जल्द ही लाहौर जा कर फिल्मों में अभिनय करने लगे.

उस समय उत्तर भारत में लाहौर ही फिल्म उद्योग की अग्रिम नगरी थी. कुछ ही समय में इनका छिपा हुआ कलाकार विकसित हुआ और समय के साथ इन्होंने बम्बई में काम करना शुरू कर दिया. बम्बई में इनकी पहली फिल्म बनी ‘निराला हिंदुस्तान’. इस फिल्म के रिलीज़ होते ही इनकी ख्याति फिल्म जगत में फैल गयी.

prem-adib-as-ram1943 में किशन से विवाहोपरांत इनकी सबसे लोकप्रिय फिल्म ‘राम राज्य’ बनी जिसने देश भर में दर्शकों का दिल जीत लिया और इन्हें विशेष ख्याति दिलाई. महात्मा गांधी ने भी यह फिल्म देखी. इस फिल्म ने 101 सप्ताह से भी अधिक चलने का कीर्तिमान हासिल किया.

प्रेम अदीब ने फिल्मी जीवन में जिन मशहूर अभिनेत्रिओं के साथ अभिनय किया वे थीं सुरैय्या, सुलोचना, शोभना समर्थ, सुमित्रा देवी, रतन माला और बेगम पारा. इनकी मशहूर फिल्मों में शामिल हैं – अनोखी अदा, अंगुलीमाल, राजरानी मीरा, आधी रोटी, तीसरी गली, दिल्ली दरबार, गीत गोविन्द, कृष्ण सुदामा, साधना दर्शन, स्टेशन मास्टर, देहाती, कसम, भोली, नीलमणि, महरानी मिलन, चांद, विक्रमादित्य, एक्ट्रेस, मुलाकात, लव कुश, राम विवाह, भरत मिलाप, राम हनुमान युद्ध, पृथ्वीराज चौहान, रामभक्त विभीषण, राजा हरिश्चंद्र, राम बाण एवं भगत सिंह.

कहा जाता है प्रेम अदीब से पहले इतने सुंदर राम कभी परदे पर नहीं दिखे. सभी कैलेंडर व पोस्टरों में राम के रूप में इनका ही चित्र छपता था. उनमें एक विशेष मनमोहकता थी जिसने सभी का मन मोह लिया था.

शोभना समर्थ ने सीता के रूप में इनका साथ दिया था और इनकी जोड़ी बड़ी सफल हुई. प्रेम अदीब का निधन 1959 में हुआ था. दिल छू लेने वाले अभिनय ने इन्हें न सिर्फ फिल्म जगत में एक विशेष स्थान दिलाया बल्कि सदा के लिए अमर कर दिया.

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