प्लेन को टक्कर देती भारतीय ट्रेन

भारतीय वैज्ञानिकों ने हवा से बात करने वाली ट्रेन बनाने का दावा किया है. उनका कहना है कि यह ट्रेन 800 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से चलेगी. यह ट्रेन प्रदूषण मुक्त होगी और इसके दुर्घटनाग्रस्त होने की भी कोई गुंजाईश नहीं होगी.

इंदौर स्थित राजा रमन्ना सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने इस बाबत अपने हाई स्पीड ट्रेन के प्रोटोटाइप का प्रदर्शन भी किया. वैज्ञानिकों की टीम का नेतृत्व कर रहे डा. आरएस शिंदे ने बताया कि उनकी ट्रेन हवा से बात करने की क्षमता रखती है.

वैज्ञानिकों को बस सरकार की अनुमति का इंतज़ार है ताकि वे कम से कम 10 से 15 किमी की दूरी पर इस ट्रेन का परिक्षण कर सकें. इस उपलब्धि पर डा. शिंदे ने बताया कि नई ट्रेन टेक्नोलॉजी एक बड़ी सफलता है, चूंकि यह तकनीक अब तक सिर्फ चीन व जापान के पास ही थी.

मैग्लेव ट्रेन

इस ट्रेन को मैग्लेव ट्रेन कहते हैं और इसे लोहे की पटरियों पर नहीं बल्कि उससे थोड़ा ऊपर हवा में दौड़ाया जाता है. इस ट्रेन को मैग्नेटिक सिस्टम से चलाया जाता है. यह पूरी तरह से प्रदूषण-मुक्त तकनीक है और इस ट्रेन को चलाने में किसी दुर्घटना की आशंका भी नहीं रहती.

राजा रमन्ना सेंटर को इस प्रोजेक्ट के लिए मैगनेट उपलब्ध कराने वाली कंपनी हेक्सा मैगनेट के अधिकारी आरुष कुमार के अनुसार मैग्लेव ट्रेन पूरी तरह से स्वदेशी रूप से विकसित की गई है जिसका हिस्सा बनकर उन्हें ‘मेक इन इंडिया’ और ‘क्लीन इंडिया’ जैसे अभियानों में भागीदारी करने का मौका मिला है.

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