नारोहितो बने जापान के नए राजा

नारोहितो जापान के नए राजा बन गए हैं. सम्राट अकिहितो की उपस्थिति में उन्हें राजसिंहासन पर बैठाया गया. अपने बड़े बेटे नारोहितो की ताजपोशी अकिहितो ने व्हील चेयर पर बैठ कर देखी.

इसी के साथ जापान में एक नया युग शुरू हो गया. नए युग का नाम रेइवा है जो नारोहितो के शासनकाल तक चलेगा.

59 वर्षीय नारोहितो देश के 126वें राजा बने हैं. नारोहितो और उनकी रानी मसाको दोनों ही ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से पढ़े हैं.

राज्यों और साम्राज्यों की चर्चा एक ओर जितनी रोमांचक होती है वहीं दूसरी ओर शिक्षाप्रद और अनुभवपूर्ण भी

जापान राज वंश की परंपरा विश्व के प्राचीनतम साम्राज्यों में से एक है. जापानी सभ्यता के अनुसार राजा कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि भगवान की अभिव्यक्ति है.

पद त्याग करने के बाद अकिहितो अब चक्रवर्ती सम्राट कहलाएंगे. दिसंबर 2013 में अकिहितो रानी मिशिको के साथ भारत यात्रा पर आए थे जब उन्होंने न्यू दिल्ली स्थित लोदी गार्डन की सैर का आनंद लिया था.

यह जानना महत्वपूर्ण है कि जापान में स्त्री को राजगद्दी पर बैठने का अधिकार नहीं है.

वैटिकन में कौन है राजा

चर्चा जब साम्राज्यों की होती हो, तब रोम और इटली के बीच स्थित छोटे से राज्य वैटिकन को नहीं भुलाया जा सकता.

वेसे तो सऊदी अरब, ओमान, ब्रूनेई और स्वाज़ीलैंड जैसे देशों में भी पूर्ण क्षमता के शासक हैं पर किसी की भी तुलना वैटिकन के पोप की शक्तियों से नहीं हो सकती.

वैटिकन का एक विस्मय पूर्ण तथ्य यह भी है कि वहां पूर्ण साम्राज्य तो है पर इस साम्राज्य में वंशवाद के बीज नहीं है.

इसके अलावा थाईलैंड के साम्राज्य की भी एक बात बतानी महत्वपूर्ण है.

थाईलैंड में संवैधानिक साम्राज्य है, वहां संविधान भी है, प्रधानमंत्री भी हैं और राजा भी है, पर सबके अधिकार भिन्न हैं.

राजा वहां के सशस्त्र बलों का अध्यक्ष भी है और देश का सर्वोच्च नायक भी.

थाईलैंड के नागरिकों में राजा के प्रति जो सम्मान और आदर है वो कहीं नहीं हो सकता.

क्या होता है राजसी साम्राज्य

राजसी साम्राज्य, जिन्हें लोक-प्रचलित भाषा में मोनार्की कहा जाता है, विश्व के अन्य कई देशों में देखे जा सकते हैं. पर अब इनके दो विभाग हो गए हैं, एक है संवैधानिक साम्राज्य और एक है पूर्ण साम्राज्य.

संवैधानिक साम्राज्य में देश का संविधान ही प्रमुख होता है, राजा केवल उस संविधान के रक्षक के रूप में स्थापित है.

राजा को अपनी ओर से निर्णय लेने का अधिकार कोई नहीं होता और यदि राजा संविधान के प्रावधान का उल्लंघन करे, तो न्यायपालिका हस्तक्षेप कर सकती है.

वहीं दूसरी ओर पूर्ण साम्राज्य में राजगद्दी पर बैठा राजा ही सर्वोच्च सत्ता के रूप में नियम बना भी सकता है, उन्हें बदल भी सकता है और नियम उल्लंघन की सजा भी वो स्वयं ही निर्धारित करता है.

विश्व में अनेक देश हैं जो संवैधानिक या पूर्ण साम्राज्य द्वारा शासित हैं. इनमें से शीर्ष महारानी एलिज़ाबेथ हैं जो ब्रिटेन साम्राज्य की महारानी हैं.

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