भारत की पहली टॉय डाक्यूमेंट्री

इनसे मिलिए. खिलौने इनके लिए एक शौक से कहीं बढ़कर हैं. जनाब शादी के बाद हनीमून के लिए विदेश गए तो वहां भी खरीददारी करते हुए अपने खिलौनों को बटोरा. ख़ास मौकों पर इनके मित्र इन्हें खिलौने हीं भेंट करते हैं. पेशे से टेक्नीकल आर्टिस्ट हर्षवर्धन राघव एनीमेशन से तो खूब खेलते हैं लेकिन बात जब जुनून की हो तो इन्हें टॉय यानी खिलौने पसंद हैं. अब तो इनका फेसबुक पेज इंडियन टॉय कलेक्टर्स नए-नए खिलौने और उन खिलौनों की अदाओं से फैन्स को लुभा रहा है. फेसबुक पर इनके ग्रुप पेज से देश के अन्य टॉय कलेक्टरर्स भी जुड़ रहे हैं.

आपके खिलौने जीवन में कितनी अहमियत रखते हैं?

सच बताऊं तो मै रोज ही खिलौनों के बारे में सोचता हूँ. अब नया कौन सा टॉय लेना है, ये लिस्ट बनाता हूँ. पर अगर प्राथमिकता की बात करें तो इनकी प्रेफेरेंस मेरे परिवार, नौकरी और स्वास्थ्य के बाद ही है, जो कि ऐसा ही होना चाहिए.

खिलौने इकठ्ठा करने का आपका शौक कब शुरू हुआ?

ये शौक मुझे शायद बचपन से ही था. मैं बाहर खेलने कम ही जाता था. घर बैठ कर अपने खिलौनों (जी आई जोज़, हॉट वील्स) से ज्यादा खेलता था. पर जैसे-जैसे मैं बड़ा हुआ, ये शौक कहीं खो गया. पर जब मेरी नौकरी लगी और मैंने कुछ फिल्मों के खिलौने देखे, तो मै खुद को रोक नहीं पाया. तब मुझे एहसास हुआ कि ये एक शौक से कहीं ऊपर है.

आपका फेसबुक ग्रुप पेज इंडियन टॉय कलेक्टर्स आपके लिए क्या मायने रखता है?

मेरे लिए फेसबुक इस्तेमाल करने का मतलब ही इंडियन टॉय कलेक्टर्स ग्रुप है. जब मैंने ये ग्रुप पांच साल पहले बनाया था तब मुझे लगता था कि सिर्फ मैं ही ऐसा इंसान हूँ जो खिलौने इकठ्ठा करता है. पर कुछ एक महीने बाद ही मुझे पता चलने लगा कि मुझसे भी बड़े-बड़े कलेक्टर्स हैं, तो रेस्पोंस काफी अच्छा रहा. इस ग्रुप से मेरी अपेक्षाएं हैं कि जब मेरे बच्चे हों और वो कभी टॉय खरीदें तो वे भी इस ग्रुप में अपने खिलौनों से जुड़ी जानकारियां शेयर करें.

आपका एक वाक्य डिस्प्ले इज मस्ट काफी मशहूर हो चला है. उसके बारे में क्या कुछ कहना चाहेंगे?

हा हा हा! मुझे कभी नहीं पता था कि वो मशहूर होगा. मैंने जब अपनी डॉक्युमेंट्री बनाई थी तो उसका सबसे महत्वपूर्ण कारण था लोगों को बताना कि हम खिलौने क्यों कलेक्ट करते हैं और खिलौनों के लिए डिस्प्ले शेल्फ जरूरी है. तभी ये वाक्य लोगों को भा गया.

आपको सबसे ज्यादा किस तरह के खिलौने इकठ्ठा करना पसंद है?

मुझे जी आई जोज़ और हॉट वील्स बहुत पसंद है, क्योंकि उनसे मेरे बचपन की  यादें जुड़ी हैं. पर मैं अब मार्वेल एवं डी सी कॉमिक्स और मूवीज़ के खिलौने इकठ्ठा करता हूँ. बैटमैन मेरा फेवरेट कैरेक्टर है.

आपके जुनून को देखकर जाहिर है कि आपका खिलौनों के साथ एक अटूट बंधन है.

मेरा पहला खिलौना (एक जी आई जो) बचपन में ही कहीं खो गया था. सालों बाद जब मैं दोबारा खिलौने इकठा कर रहा था तब मुझे वैसा टॉय कहीं नहीं मिला. आखिरकार, लगभग वैसा ही दिखने वाला एक जी आई जो मैंने यू.एस. से मंगवाया. तो, मैं यही कहना चाहता हूँ कि ये सच है कि सच्चे मन से जो मांगो वो जरूर मिलता है.

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इंडियन टॉय कलेक्टर्स ग्रुप के माध्यम से आप अपने जैसे अनेक लोगों को जान पाए, उनसे मिले, और इसी शीर्षक से आपने एक डॉक्युमेंट्री भी बनाई. पर अपनी फिल्म में आपने कहीं भी किसी महिला टॉय कलेक्टर का कोई ज़िक्र नहीं किया. इसका क्या कारण है?

हां, ये सच है कि उस वक्त जब मै डॉक्युमेंट्री बना रहा था तब शायद ही मैं किसी महिला कलेक्टर को जानता था. पर हां, महिला कलेक्टर्स हैं जो कि काफी सीरियस हैं. पर बाकी पुरुष कलेक्टर्स की तुलना में वे कम हैं.

अपने शौक को पूरा कर पाना एक सपने को जीने जैसा लगता है. खासकर इस तरह बखूबी से इस जुनून को कायम रखना भी काबिले तारीफ है. क्या आपने कभी इसे एक विशेषाधिकार या स्पेशल स्टेटस की तरह देखा जिस शौक को समाज के कुछ ही वर्ग के लोग अपना सकते हैं?

नहीं. मैं ऐसा नहीं मानता कि ये एक स्पेशल स्टेटस है. बाजार में 50 रूपये से लेकर लाखों रूपये के खिलौने हैं. ये आपके ऊपर है कि आप क्या कलेक्ट करना चाहते हैं.

आपके पास कुल कितने खिलौने हैं?

मुझे अपने खिलौने गिनना बिलकुल पसंद नहीं है. इसलिए मैंने कभी ये किया ही नहीं.

टॉय कलेक्शन के बारे में कुछ टिप्स.

इसे अपने जुनून के लिए करें, कोई कमाई करने के लिए नहीं.

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