ब्लॉगिंग की क्लास में वेबसाइट बनाना सीखें

ब्लॉगिंग एवं वेबसाइट से संबंधित छोटी-छोटी जानकारियां यहां आपको बड़ी सूझ दे सकती है. सबसे पहले खुद से पूछें, क्या आपके पास हर रोज़ नहीं तो सप्ताह में कुछ घंटे खाली हैं…! अगर इसका जवाब हां है, तो आप ब्लॉगिंग के लिए योग्य हैं. सिर्फ किसी होड़ में शामिल होने के लिए ना तो ब्लॉगिंग है और ना ही वेबसाइट.

आइए सीखें ब्लॉग व वेबसाइट दोनों के ही बारे में ही कुछ न कुछ, बड़ी आसानी से.

ब्लाग क्या है या वेबसाइट क्या है, इसका जवाब यहां खोजने की कोशिश बिलकुल नहीं की जाएगी. आप तो एक यात्रा पर चल पड़े हैं जिसके विषय में आप कई दिनों से सोच रहे थे.

अब यह जरूरी है कि आपके ब्लॉग या वेबसाइट का नाम क्या हो, टैग लाइन क्या हो. वह किस भाषा में हो और किस विषय पर हो – किसी ख़ास विषय पर या फिर यूं ही जो जी चाहे.

आपके लिए यह जानना अहम है कि शुरुआत में आपको कुछ भी खर्च करने की जरूरत नहीं होगी. अपनी रुचि और विशेषज्ञता के अनुसार ब्लॉग शुरू किया जा सकता है. अलबत्ता कई माईने में ब्लॉग और वेबसाइट में कोई अंतर नहीं है.

दोनों की पहचान तब अलग होती है जब इसमें प्रोफेशनलिज्म जुड़ने लगता है और व्यक्ति अपने कार्यक्षेत्र को बढ़ाना चाहता है.

ब्लॉग या वेबसाइट इंटरनेट पर आपका घर और ऑफिस है. उसे आप जितना उपयोगी व आकर्षक रूप में प्रस्तुत करना चाहेंगे वहां उतना ही काम करना पड़ेगा.

अगर आप लजीज व्यंजन बना सकते हैं, अपने विचार से दुनिया को अवगत करना चाहते हों या फिर समाचार-विचारों पर अपनी प्रतिक्रिया करते रहना चाहते हैं तो आपने आज सही पाठशाला में नामांकन लिया है.

ब्लॉगिंग एवं वेबसाइट से संबंधित छोटी-छोटी जानकारियां.

मान लीजिए आपने अपने साइट का नाम ‘सतयुग’ सोचा है और टैगलाइन बनाई है- ‘आधुनिक भारत की आवाज’ और यकीनन हिंदी भाषा में ही आपको लिखना है, तो सबसे पहले इंटरनेट पर जरूर सर्च कर लें कि ‘सतयुग’ नाम से कोई अन्य ब्लॉग या वेबसाइट तो कहीं रजिस्टर्ड नहीं है!

किसी अन्य व्यक्ति या संस्था से मुकाबला क्यों करना! अगर अन्य किसी ने सतयुग डॉट कॉम बना रखा है या फिर सतयुग ब्लॉगस्पॉट इन या सतयुग वर्डप्रेस कॉम पहले से रजिस्टर्ड है तो कोई और नाम सोच लें, जैसे- सतयुग जीवन या सत्यविचार या फिर अपने नाम से ही ब्लॉग या वेबसाइट बनाई जा सकती है. मसलन सुनिधिवर्मा डॉट कॉम.

ध्यान रखने योग्य है कि शुरु में अपने नाम से कोई डोमेन खरीदने की आवश्यकता नहीं है. जैसे-जैसे आपकी रूचि बढ़ेगी और आप लोकप्रिय होंगे फिर अपना डोमेन खरीद सकते हैं. इसके लिए शुरुआत में प्रति वर्ष 100 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक खर्च करना पड़ सकता है.

भारत में आप तो ‘इन’ डोमेन भी ले सकते हैं, जैसे सुनिधिवर्मा डॉट इन या कंटेट आनलाइन डॉट इन. डॉट इन डोमेन का प्रयोग काफी सरल है और खास बात यह है कि यह भारत का अपना इंटरनेट एड्रेस है.

आज लाखों सफल व्यवसायी व उधमी अन्य लोगों के साथ जुड़ने के लिए डॉट इन डोमेन का इस्तेमाल कर रहे हैं. ड़ॉट इन डोमेन नाम अब सभी के लिए उपलब्ध हैं. कंपनियां, व्यक्ति और संगठन, चाहे भारत में हों या विदेश में, वे अब इसके पात्र हैं.

अपने इन डोमेन नाम का उपयोग करते हुए स्वयं पर गर्व करें – जो भारत के भविष्य का संकेत है

यदि आप कोई डोमेन नाम लेना चाहते हैं तो जी कैफे का उपयोग करके देखें कि यह उपलब्ध है कि नहीं. वैसे जैसा कि बताया गया आप शुरुआत में अपना डोमेन लेने से बच सकते हैं.

यह जरूर तय कर लीजिए कि कोई आपके ब्लॉग या वेबसाइट पर क्यों आना चाहेगा, आपको क्यों पढ़ना चाहेगा या आपसे क्यों संवाद स्थापित करना चाहेगा.

मान लीजिए आपकी रूचि खेल-कूद में ज्यादा है तो आप खेल-खिलाड़ी से जुड़ी जानकारियों पर नजर रखें और किसी गतिविधि या जुड़ी घटना पर अपने विचार बनाकर शुरुआत में 200 शब्द का ही एक नोट बनाने की कोशिश करें.

यदि आप इंटरनेट के किसी भी माध्यम से पैसा कमाना चाहते हैं, तो आपको अपने कंटेंट की प्रस्तुति को वजनदार रखना होगा

इंटरनेट पर ब्लॉगिंग की शुरुआत कैसे की जाए

आप सीधे अपने मोबाइल या कंप्यूटर में इंटरनेट खोलें. एड्रेस बार में वर्डप्रेस या ब्लॉगर खोजें. वर्डप्रेस का इंटरनेट एड्रेस है- wordpress.com तथा ब्लॉगर के लिए blogger.com. दोनों ही मुफ्त सेवा है.

ब्लॉग्गिंग वेबसाइट

दोनों ही प्लेटफार्म पर उपलब्ध सेवा तथा फीचर देखें. दोनों ही प्लेटफार्म सहज और सुगम तरीके से आपको ब्लॉग करने की सुविधा देता है. सब कुछ आपको आसान लगेगा, आपकी पसंद की चीजें भी आपको मुफ्त में मिलेगी. मनपसंद रंग, डिजाईन, प्लेटफार्म चुनकर ब्लॉग करना शुरू कर दें.

जैसे-जैसे रूचि बढ़ेगी, अनुभव होते जाएंगे. कौन जाने कुछ ही दिनों में आप देश-दुनिया में छा जाएंगे. और फिर तो, आपकी साईट पर विज्ञापन भी आने लगेंगे, जिससे आपको आर्थिक लाभ भी मिलने लगेगा. लेकिन उस दिन के लिए आपको खूब मेहनत करनी होगी, अपना कंटेंट खुद लिखना होगा, अपनी खींची तस्वीर डालनी होगी, और कॉपी-पेस्टिंग से बचना होगा.

इसी के साथ ब्लॉगिंग की पाठशाला को अब विराम दिया जाता है. ब्लॉगिंग क्लास के अंत में यह भी जान लें कि आप चाहें तो फेसबुक पर अपना पेज बनाकर वहीं अपनी सारी इच्छाएं पूरी कर सकते हैं. अब फेसबुक पेज बिलकुल बदल गया है, जहां आप ब्लॉग या वेबसाइट से मिलता जुलता लुक देख सकते हैं. 

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