हैदराबाद की वह बदनसीब लड़की और आप

निर्भया नाम से प्रचारित बस गैंग रेप कांड और अब हैदराबाद में एक महिला डॉक्टर को जलाकर मार देने की घटना के बाद क्या किसी ने आपसे पूछा, “कैसा लग रहा है?” या “क्या कहना है आपका?”

अगर आप लड़की हैं तो इन घटनाओं की चर्चा आपसे ज़रूर हुई होगी. आप लड़की नहीं भी हैं तो कम से कम किसी न किसी महिला को तो आप जानते ही होंगे. उनसे मां, बहन, पत्नी या बेटी का रिश्ता तो होगा ही.

क्या आपको लगता है कि वो सुरक्षित हैं? अगर आपका जवाब हां है तब भी आपको सोचने की जरूरत है क्योंकि कई ऐसे लोग हैं जिनकी बेटियां, बहनें, पत्नियां या मां असुरक्षा के माहौल में रह रही हैं.

हैदराबाद की घटना ने हमें देश के हालात पर गंभीरता से सोचने के लिए (दोबारा) मजबूर कर दिया है.

यह कितना शर्मनाक है कि किसी लड़की के साथ जब कोई हादसा हो जाता है तो लोग यह जानने की कोशिश करते हैं कि पीड़िता ने क्या पहना था, वह किस वक़्त बाहर निकली थी, किसके साथ थी, क्या कर रही थी. किसने उसके साथ गलत किया. और फिर बहस छिड़ जाती है जो कुछ दिन बाद ठंडी हो जाती है.

टेलीविजन की दुनिया है तो लोग ऐसी रिपोर्टिंग ढूंढते हैं कि हिंसा कितनी हुई, कैसे हुई, मानो उन्हें उसमें रस मिल रहा हो, कोई रोमांच आ रहा हो. यह खौफनाक है.

हाल के दिनों में एक ऐसे ही मामले ने लोगों को हिंदू-मुस्लिम में बांट दिया. बताया गया कि जम्मू कश्मीर के कठुआ में रेप एक मुस्लिम बच्ची के साथ हुआ जिस मामले में सभी अभियुक्त हिंदू हैं.

जब आप यह पढ़ रहे हैं तब भी आपके राज्य में पुलिस कई बलात्कारियों की तलाश कर रही है जिनकी अब तक शिनाख़्त भी नहीं की जा सकी होगी.

पीड़िता क्या बताए जब कोई चेहरा पहचाने जाने लायक न हो, न उसे किसी का नाम पता हो, न घर मालूम हो और न ही फोन नंबर.

आए दिन यहां-वहां किसी-न-किसी बच्ची का क्षत विक्षत शव किसी शहर के एक खेल के मैदान में झाड़ियों में पड़ा हुआ पाया जाता है और शरीर पर चोटों के कई निशान पाए जाते हैं.

हैदराबाद की ताज़ा घटना के बाद क्या हम मान लें कि ये घटनाएं चौकाने वाली नहीं हैं क्योंकि हमारा समाज ऊंच-नीच से भरा है, हमारी प्रवृति पितृसत्तात्मक है और देश तेजी से दो धड़ों में बंट रहा है जिसमें नफ़रत के सहारे वोट जुटाए जा रहे हैं.

सरकारें कह तो रही हैं कि “न्याय मिलेगा”, लेकिन उनकी ओर से आने वाले आश्वासन के मायने अब धीरे–धीरे कम होने लगे हैं.

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