इजी मनी का लालच

टीवी, रेडियो, अख़बार और अन्य संचार माध्यमों से सेलिब्रिटी या हस्तियों से भ्रामक विज्ञापन करा कर आपको ठगा जाता है और आप उसमें फंस जाते हैं. कुबेर, सहारा, शारदा और रोज वैली जैसे घोटालों में भी ठग लिए जाने के बावजूद लोग सचेत नहीं हुए. बिना मेहनत के अमीर बनने का ख्वाब लाखों घर डूबोता रहता है.

हाल में हुए एक नए फ्रॉड में पता चला कि एक निश्चित रकम लेकर लोगों को इंटरनेट के माध्यम से कुछ लिंक लाइक करने के लिए कहा जा रहा था. फेसबुक और ट्वीटर की तरह लाइक करने पर पैसे देने का वादा किया जा रहा था, जिससे लोग तेजी से इन कंपनियों की ओर आकर्षित हो रहे थे, और फिर ठग अपना काम निपटा रहे थे.

अब तो रिटायर्ड लोग, महिलाएं और मजदूर-किसान भी फर्जी कंपनियों के ठगी की झांसे में आ रहे हैं. ताज़ा मामले में सोशल ट्रेड कंपनी द्वारा सात लाख लोगों से 3700 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की बात कही गई है. ऐसी फर्जी कंपनियां फिल्मी सितारों से कुछ ज्यादा ही प्रमोशन कराती हैं ताकि लोगों का भरोसा जीता जा सके.

ऐसी फर्जी कंपनियों का दावा होता है कि लोग जितना उनमें निवेश करेंगे उसका कम से कम ढाई गुना वे एक साल के भीतर ही उन्हें वापस कर देंगी, और अधिकतम की तो कोई सीमा ही नहीं है. ‘स्पीक एशिया’ नाम की कंपनी ने भी कुछ साल पूर्व ऑनलाइन सर्वे करने के नाम पर शुरुआत में लोगों को जमकर पैसा बांटा और जब लाखों लोग उससे जुड़ गए तो वह सारा पैसा लेकर गायब हो गई.

शारदा घोटाले में 17.4 लाख लोगों से 20,000 करोड़, रोज वैली में 60,000 करोड़ और सहारा मामले में 36,000 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी होने का अनुमान है.

इस दुनिया में पैसे बहुत आसानी से नहीं कमाए जा सकते, यह परखा हुआ सच है. लेकिन, फिलहाल तो सोशल मीडिया के नाम पर ठगी करने वाली कंपनियों की देश में बाढ़ आ गई है. कंपनियां ऑनलाइन वीडियो देखने के नाम पर लोगों के मोबाइल पर मैसेज, व्हाट्सएप और ई-मेल के द्वारा संपर्क करती है. कंपनियां लोगों को समझाती हैं कि वीडियो देख या लिंक लाइक कर आप घर बैठे लाखों कमा सकते हैं.

मल्टीलेवल मार्केटिंग के रूप में लोगों से ठगी का यह कोई नया मामला नहीं है. इसमें नया सिर्फ इसका तरीका है. अब क्योंकि देश में हर किसी के हाथ में स्मार्टफोन है और उसे समझ आता है कि फेसबुक या व्हाट्सएप पर लाइक या शेयर करने में नुकसान क्या है. लेकिन, लोगों की समझ में यह नहीं आता कि अगर आप कुछ काम नहीं कर रहे हैं तो आपको मोटे पैसे कोई कैसे दे सकता है.

पढ़ने-लिखने में अपनी एक चौथाई उम्र गुजार कर युवा जब नौकरी शुरू करता है तो उसे अपने दफ्तर में कई चुनौतियों से जूझना पड़ता है, तब वह एक वेतन कमा पाता है. अगर इजी मनी के नाम की कोई चीज दुनिया में होती तो हर कोई वही करने में रूचि लेता, काम करने के लिए कोई रोज दफ्तर क्यों जाता?

मल्टीलेवल मार्केटिंग कंपनियां तो एक आदमी को पांच लोगों की टीम बनाने को कहती हैं. इसके बाद टीम से जुड़ने वाला हर शख्स पांच-पांच लोगों को जोड़ता है. यह सिलसिला लगातार चलता रहे तो कुछ दिनों में ही कंपनी से लाखों लोग जुड़ जाते हैं. कंपनियां लोगों को लालच देती हैं कि टीम जैसे-जैसे बड़ी होगी हर एक सदस्य का मुनाफा और बढ़ता जाएगा. आठ-दस महीने के बाद आपकी टीम में लाखों जुड़ जाएंगे. तब आपकी रोज की कमाई कई लाखों में हो जाएगी.

इस तरह की योजनाओं से लोगों को बचाने के लिए रेडियो, प्रिंट और टीवी पर कई कैंपेन शुरू किए गए हैं. समझने की बात यह है कि जब-जब लोगों को फर्जीवारे का पता चलता है तब-तब उनमें खलबली मच जाती है लेकिन फिर एक और फर्जी कंपनी आ जाती है जिसपर वे भरोसा कर बैठते हैं.

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अमित त्यागी ...born as a human, trying to learn humanity.

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