कितनी भरोसेमंद होंगी ड्राईवरलेस कार

बिना ड्राइवर की गाड़ी  हमें कोरी कल्पना लगती थी. पर यह कल्पना हकीकत बन चुकी है. बिना ड्राईवर की गाड़ियां चलने लगी हैं. हालांकि केंद्र सरकार ने कह दिया है कि ऑटोमोबाइल कंपनियों को भारत में बिना ड्राइवर वाली कार उतारने की इजाजत नहीं दी जाएगी.

ज्ञात हो कि दस साल पहले जर्मन कार निर्माता फॉक्सवैगन ने अपनी एक गाड़ी ट्यूरेज एसयूवी को बिना चालक के ऑफ-रोड ट्रेक पर दौड़ाया था. तब से ही दुनिया भर में इसी टेक्‍नोलॉजी यानी सेल्फ ड्राइविंग कारों को लाने की तैयारी हो रही है. गूगल और एप्पल जैसी टेक्नोलॉजी कंपनियों समेत दुनिया भर के रिसर्चर ऐसी कार बनाने पर काम कर रहे हैं जो ड्राइवर के बिना चल सके.

इस क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती कार के आस पास मौजूद चीजों को पहचानना है. बिना ड्राइवर के गाड़ी चलाने में कठिनाई रास्ते को पहचानने या नेविगेशन की नहीं है. ये काम तो आजकल सामान्य गाड़ियां भी कर लेती हैं. मुश्किल बात रेड लाइट, ट्रैफिक साइन और पैदल चलने वाले लोगों को पहचानना है.

सड़क पर चलने वाले लोगों को पहचानना बहुत जरूरी है ताकि गाड़ी उसके अनुकूल खुद को ढाल सके.

जर्मनी में स्थित यूरोप के सबसे बड़े ड्राइविंग सिमुलेटर में इस बात की जांच की जा रही है कि ड्राइव करते समय इंसान की क्या-क्या प्रतिक्रियाएं होती हैं. सामान्य से लेकर आपात परिस्थिति की प्रतिक्रियाओं के अनुरूप वहां डेटा की मदद से वैज्ञानिक लोगों के होशोहवास का आकलन कर रहे हैं.

मकसद ये है कि बिना ड्राईवर की गाड़ी आस पास के माहौल को उसी तरह पहचाने जैसा कि हम इंसान करते हैं. इन कार्यों से जुड़े वैज्ञानिकों का मानना है कि इंटेलिजेंट कार सचमुच में ड्राइवर से ज्यादा भरोसेमंद बनाए जा सकते हैं.

महसूस करके देखिए. कि आप कार में बैठे हैं और ड्राइविंग सीट पर कोई नहीं है. और आप जा पहुंचे हाईवे पर जहां गाड़ी 120 किलोमीटर की रफ्तार से जा रही है, और स्टीयरिंग व्हील अपने आप हिल रहा हो. कैसी भावना होगी वह.

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