फेमिनिज्म बनाम फेमिनिस्ट ड्रेस

‘फेमिनिस्ट’ शब्द सुनते ही आपके मन में जो छवि आती है, वह क्या एक अधेड़ उम्र की औरत की है, जो ढीले ढाले कपड़े पहनती हो और बड़ी बिंदी लगाती हो? या आपकी कल्पना में कोई ऐसी फेमिनिस्ट महिला है, जो ज़माने के हिसाब से कुछ ज्यादा ही मॉडर्न तरीके से ड्रेस अप करती हो?

यदि ऐसा है, तो आइए ज़रा आगे बढ़ कर मुआयना करें कि फेमिनिस्ट ड्रेस हो तो कैसी हो, क्या हो.

निसंदेह ‘फेमिनिस्ट’ शब्द को केवल आर्ट और साहित्य से जोड़ना मूर्खता होगी. कहा जा सकता है कि फेमिनिस्ट ड्रेस का किस्सा सन 1900 के दौरान इंग्लैंड में हुए सफ्र्गेट मूवमेंट्स से शुरू हुआ.

फेमिनिस्ट ड्रेस

इतिहास एवं पौराणिक कथाओं में भी इसके उदाहरण पाए जा सकते हैं. इक्कीसवीं सदी में, खासकर 2016 से शुरू हुए फैशन ट्रेंड्स में नारीवाद एक्सक्लूसिव के बजाए, इन्क्लूसिव होता नज़र आया, जो कि किसी के भी साइज, शेप और यौन अभिविन्यास पर आश्रित नहीं था. 

मारिया ग्राजिया चिउरी के डाओर स्प्रिंग कलेक्शन अपने फेमिनिस्ट थीम के कपड़ों और उसके प्रभाव की वजह से काफी चर्चित रहे. रिहाना, जेनिफर लौरेंस और एमा वॉटसन जैसे सितारे भी डाओर की इन ड्रेसेज में दिखे.

भारत में भी अलग-अलग क्षेत्रों के चर्चित चेहरे कुछ ‘फेमिनिस्ट ड्रेसेज’ को फ्लॉन्ट करते नज़र आते रहते हैं. ‘वैजोर’ नामक फैशन वेबसाईट ने अपना ‘आइ वीयर फेमिनिस्ट’ कलेक्शन भी लॉन्च किया हुआ है.

एक फेमिनिस्ट ड्रेस ना ही एक साड़ी है, ना ही कोई ढीला ढाला कुर्ता. यह ना ही वो ड्रेस है जिस पर ‘फेमिनिस्ट’ या कोई बोल्ड कोट लिखा हो. यह होवार्ड मिलर द्वारा डिजाइन की हुई ‘वी कैन डू इट’ वुमन के प्रिंट की कोई ट-शर्ट भी नहीं है.

यह हर वह ड्रेस है जिसे आप अफोर्ड कर सकें, और जिसे पहन कर आरामदायक एवं आश्वस्त महसूस कर सकें.

यह ड्रेस किसी विशिष्ट लिंग या वर्ग के लिए नहीं है. यह हर वो ड्रेस है जो एक महिला के हौसले और शक्ति का प्रतीक हो, और उसे अपने परिवार एवं समाज में निर्णय लेने की ताकत और स्व-मूल्य की भावना दे.

फेमिनिज्म, यानि नारीवाद, एक विशिष्ट प्रकार की पोशाक पहनना, या कोई विशिष्ट लुक फौलो करने के बारे में नहीं है. फिर वो एक कॉटन की साड़ी हो, या स्पेगेटी और शॉर्ट्स; नाक में नथिया हो या पैरों में हील्स; उसे एक समलैंगिक इंसान ने पहना हो, या किसी महिला या पुरुष ने; चुना तो आपको आराम देने वाले ऑउटफिट को ही जाएगा.

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