बीसीसीआई की क्या किस्मत बदलेंगे गांगुली

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) में सुधार लाने के लिए जस्टिस लोढा कमीशन नियुक्त किया गया, लोढा कमीशन ने अपनी सिफारिशें दीं, उन पर भी अमल नहीं हुआ, जिसके बाद बीसीसीआई को चलाने के लिए प्रशासकों की समिति (सीओए) की नियुक्ति की गई जिसने 33 महीने के लंबे समय तक काम किया जबकि सीओए को लोढा सिफारिशें लागू करवाने के लिए छह महीने का समय दिया गया था.

सीओए भी पूरी तरह बीसीसीआई में सुधार नहीं ला सका. बीसीसीआई के चुनाव 23 अक्टूबर को होने हैं लेकिन बंगाल टाइगर और पूर्व भारतीय कप्तान सौरभ गांगुली का नया बीसीसीआई अध्यक्ष बनना तय हो चुका है क्योंकि उनके सामने कोई उम्मीदवार ही नहीं है.

मैच फिक्सिंग के दंश से अब से 19 साल पहले जूझ रही भारतीय क्रिकेट को गांगुली ने अपनी कप्तानी से नया जीवन दिया था और एक ऐसी टीम खड़ी की थी जो दुनिया की मजबूत टीमों को आंखों में आंखें डालकर टक्कर दे सकती थी.

बंगाल टाइगर के नाम से मशहूर गांगुली को अब बीसीसीआई की किस्मत बदलने की जिम्मेदारी मिली है जो पिछले तीन वर्षों में किसी न किसी विवाद से जूझती रही है.

टीम इंडिया इस समय विश्व की नंबर एक टेस्ट टीम और वनडे में दूसरे नंबर की टीम है लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) में उसका दबदबा घटा है और इस बात को गांगुली ने भी स्वीकार किया है.

क्रिकेट का सबसे अधिक राजस्व भारत से आता है लेकिन भारत को इस राजस्व का उतना हिस्सा नहीं मिल पाता जिसका वह हकदार है.

Saurav Ganguly takes over as the new BCCI President

गांगुली जीवट के खिलाड़ी और कप्तान रहे हैं जिन्होंने स्टीव वा की अजेय टीम का विजय रथ कोलकाता में 2001 में रोका था लेकिन बीसीसीआई एक ऐसा तिलस्म है जिसकी पेचीदगियों को सुलझाना नाकों चने चबाने के बराबर है.

सीओए प्रमुख विनोद राय 33 महीने गुजारने के बाद बीसीसीआई को सुधार नहीं पाए और अब गांगुली को बीसीसीआई को 10 महीने में सुधारना होगा. बीसीसीआई नियमों के अनुसार अनिवार्य कूलिंग ऑफ अवधि के कारण गांगुली को जुलाई 2020 में यह पद छोड़ना होगा.

गांगुली के पास अध्यक्ष पद ज्यादा समय नहीं रहेगा. बीसीसीआई के नए संविधान के अनुसार किसी पदाधिकारी को तीन साल की कूलिंग ऑफ अवधि में जाना पड़ेगा यदि उसने किसी राज्य संघ या बीसीसीआई स्तर पर लगातार छह वर्ष पूरे कर लिए हों.

गांगुली बंगाल क्रिकेट संघ के पदाधिकारी हैं जहां वह हाल ही में अध्यक्ष चुने गए थे. उनके पास कूलिंग ऑफ अवधि आने तक 10 महीने बाकी हैं.

बंगाल टाइगर के लिए चीजें आसान नहीं हैं. यह हैरानी की बात है कि जब वह मुंबई में अपना नामांकन भरने जा रहे थे तो उनके साथ बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन थे जिनकी आईपीएल टीम चेन्नई सुपरकिंग्स पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे और इस टीम को आईपीएल से दो साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था.

गांगुली को यह भी देखना होगा कि उनके आसपास वे लोग रहें जिनकी छवि साफ़ सुथरी हो.

गांगुली ने अपनी प्राथमिकताएं तो बताई हैं लेकिन बीसीसीआई की छवि को सुधारना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी क्योंकि आठ राज्य संघों को बोर्ड चुनाव से इसलिए प्रतिबंधित कर दिया गया है क्योंकि उन्होंने अपने संशोधित संविधान में सिफारिशों का सही ढंग से पालन नहीं किया था.

इन आठ संघों में मणिपुर, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, हरियाणा, महाराष्ट्र, रेलवे, सर्विसेज और एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज आते हैं.

यह भी दिलचस्प है कि गांगुली के नामांकन के समय उनके साथ गए श्रीनिवासन तमिलनाडु से ही हैं.

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