रोल की मांग को निभाता हूँ

यूं तो युवा वर्ग को देर शाम टेलीविजन देखने से परहेज करने की सलाह दी जाती है, परंतु संगीत के लिए लोकप्रिय हुआ टेलीविजन चैनल [वी] सप्ताहांत में ‘गुमराह’ नामक सीरियल प्रसारित कर रहा है जो युवाओं में चर्चा का विषय बना हुआ है.

Ashish Kaul‘गुमराह – मासूमियत का अंत’ एक ऐसा शो है जहां चैनल [वी] दर्शकों के लिए कुछ वास्तविक जीवन से चौंकाने वाले किशोर-अपराध से जुड़े मामले लाता है.

‘गुमराह’ की इन्हीं कड़ियों के एक एपिसोड में यह बताने की कोशिश की गयी कि कैसे ‘वेलेंटाइन डे’ मनाने के क्रम में एक युवक अपनी गर्लफ्रेंड को इम्प्रेस करने की कोशिश करता है और कैसे-क्या-कुछ गलत कर बैठता है.

इस एपिसोड के मुख्य रोल में सिने अभिनेता आशीष कॉल हैं जो अपने बेटे को मकान का ‘इ.एम.आई’ भरने क लिए एक मोटी राशि देते हैं, जिसे लुटा कर उनका बेटा झूठ-पर-झूठ बोलता है. अपनी संगत से बुरी तरह प्रभावित वह बेटा फिर अपनी ही किडनैपिंग की कहानी गढ़ लेता है.

पेश है ‘गुमराह’ के इस एपिसोड के सम्बन्ध में आशीष कौल से ‘भारत बोलेगा‘ की बातचीत के अंश:

भारत बोलेगा: ‘गुमराह’ में आपने एक व्यस्त व्यक्ति का अभिनय किया है जो अपने बेटे को मोटी राशि और पाकेट-मनी देता है. वास्तविक जीवन में भी आप एक बेटे के पिता हैं. क्या इस रोल को निभाते वक़्त आपको अपने बेटे का ध्यान आया?

आशीष कौल: नहीं. मैं एक एक्टर हूँ. रोल की मांग को हर पहलू से निभाता हूँ.

भारत बोलेगा: क्या आपके बेटे ने ‘गुमराह’ का यह एपिसोड देखा?

आशीष: जी, हां.

भारत बोलेगा: इस एपिसोड के प्रसारित होने के उपरांत इस सम्बन्ध में अपने बेटे से आपकी क्या बातचीत हुई?

आशीष: मेरे बेटे ने शुरू से मुझे घर में एक पिता और स्क्रीन पर एक्टर के रूप में देखा है. इस रोल के सम्बन्ध में खासकर कुछ विशेष बात नहीं हुई. हां, मेरा किरदार उसे पसंद आया.

भारत बोलेगा: आप मुंबई महानगर में रहते हैं. मुंबई में एक व्यस्त परिवार पर बच्चों को शिक्षित करने के साथ-साथ अच्छे संस्कार देने का कितना दवाब रहता है?

आशीष: संस्कार की बात करें तो मुंबई एक संपन्न शहर है. यहां लोग हर संस्कार की सराहना करते हैं.

भारत बोलेगा: क्या वास्तव में एक लड़के को अपनी गर्लफ्रेंड या लड़की को अपने बॉयफ्रेंड को इम्प्रेस करने के लिए महंगे गिफ्ट देने की ज़रूरत पड़ती है?

आशीष: यह व्यक्तिगत पसंद या प्राथमिकता हो सकती है.

भारत बोलेगा: आप जब मुंबई आए तब आप भी एक युवक थे. एक महानगर में एक युवक की मनोदशा के विषय में आप क्या कहना चाहेंगे? उसकी स्थिति देश के किसी अन्य शहर के युवक से कितनी भिन्न होती है?

आशीष: अनुभव कदम बढ़ाने से ही आते हैं. घर से बाहर निकलना पड़ता है. मनोदशा परिवेश से भी प्रभावित होती है.

भारत बोलेगा: ‘गुमराह’ के इस रोल को निभाने में आप पर कितना दवाब था?

आशीष: हर रोल चुनौती है. मुझे जानकारी है कि इस एपीसोड को युवा वर्ग देखता है और इससे प्रभावित भी होता है. मुझे ख़ुशी है कि मैंने अपना किरदार अच्छे से निभाया. मैं मानता हूँ कि युवाओं में इस एपिसोड से अच्छा मेसज गया है. ‘बालाजी’ ग्रुप के साथ मै दस वर्षों से भी ज्यादा समय से काम कर रहा हूँ अतः साथी कलाकारों के साथ ‘गुमराह’ में काम करना अच्छा अनुभव है.

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