सिर पर अगर सेटेलाइट गिर जाए!

सोचिए, अगर आकाश से कुछ भारी, अजीब सा गिरने लगे तो उसे कैसे संभालेंगे. जैसे, स्पेस की कक्षाओं में अगर जंक मैटेरियल ज्यादा हो जाए और अगर वह आकाश से गिरने लगे, तो क्या हो सकता है? जर्मनी के वैज्ञानिक इसका पता लगा रहे हैं.

क्या सेटेलाइट (Satellite) भी हमारे सिर पर गिर सकता है? जर्मन साइंटिस्ट सेबेस्टियन विलियम्स कहते हैं कि यह कोई मूर्खतापूर्ण सवाल नहीं हैं. उन्हें स्पेस साइंस में रिसर्च कर रहे वैज्ञानिकों ने आकाश से गिरे कई ऐसे स्पेस जंक मेटेरियल दिखाए हैं.

लगभग 40 साल पहले, 1 जुलाई 1979 का वो वाकया याद कीजिए जब पूरी दुनिया घबरा उठी. तब अमेरिका के मानवनिर्मित स्पेस स्टेशन के बारे में कहा जा रहा था कि वह पृथ्वी पर गिरेगा.

अमेरिकी अंतरिक्ष प्रयोगशाला स्काई लैब धरती पर गिरा भी. यह हिंद महासागर और पश्चिम ऑस्ट्रेलिया में गिरा. उसके गिरने से पहले पूरी दुनिया में कयास लगाए जा रहे थे कि वह धरती पर कहां गिरेगा और कितना नुकसान होगा.

हम सभी जानते हैं कि भारतीय मूल की अंतरिक्ष स्पेस शटल विशेषज्ञ कल्पना चावला (Kalpana Chawla) की मौत कैसे हुई. अमरीका के कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र पर उतरने से पहले अमरीकी अतंरिक्ष यान कोलंबिया टुकड़ों में बंट गया और इसमें सवार कल्पना चावला सहित सात अंतरिक्ष यात्री मारे गए.

जब यह यान उतरने की प्रक्रिया में था तब अमरीकी अंतरिक्ष संस्था नासा (NASA) से यान का संपर्क पूरी तरह टूट गया और यह हादसा हुआ था. इस घटना के बाद नासा के वैज्ञानिकों ने इस बात की पुष्टि की थी कि अंतरिक्ष यान का मलबा टैक्सास राज्य के डैलस इलाक़े में लगभग 160 किलोमीटर के क्षेत्र में फैल गया था.

जर्मन साइंटिस्ट विलियम्स बताते हैं कि जो लोग रॉकेट इंजन के एरोडायेनेमिक्स थ्योरी (Aerodynamics) के बारे में जानते हैं उनके लिए यह कोई सवाल ही नहीं है कि सैटेलाइट धरती पर गिर सकते हैं कि नहीं.

अंतरिक्ष की कक्षाओं में कई मृत और बेकार पड़े सैटेलाइट हैं जो आज न कल पृथ्वी पर गिर सकते हैं और इससे इनकार नहीं किया जा सकता है. वो टूट सकते हैं और उसके मलबे कहीं न कहीं गिरेंगे ही.

हां यह अलग बात है कि इसका प्रभाव कितना व्यापक होगा इसकी संभावना व्यक्त नहीं की जा सकती है.

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