प्रकृति और इंसान का अनूठा मिलन मेरे गांव सांसों के हर कोने को जीवंत बनाता है. शोर-शराबे से दूर, घने जंगलों की शुद्ध हवा और सादा जीवन यहां एक सुखद अनुभव प्रदान करता है. मेरे लिए मेरा गांव – सांसों (Saanso Village) – जीवन का सबसे सच्चा और सुंदर चेहरा है.
यहां की एक झलक ही आपको मंत्रमुग्ध कर देती है, जब बादल पहाड़ों को अपनी आगोश में लेकर जमीन पर चलते प्रतीत होते हैं. शहर के प्रदूषण से दूर यहां का वातावरण अत्यंत शांत है. ईमानदारी से कह रहा हूं कि मेरे गांव के लोग मेहनती हैं और हम सभी को सादगी पसंद हैं.
गांव के दोनों ओर बहती नदियां गर्मियों में बचपन की यादों को तरोताज़ा कर देती हैं. मेरे गांव का शिवालय मंदिर और कुल देवी-देवताओं के पारंपरिक मंदिर, ‘देवभूमि’ की आस्था और संस्कृति का अनूठा संगम हैं. सांसों गांव मेरे लिए सिर्फ एक जगह नहीं, सुकून का घर है.

इस तस्वीर में आप हमारे मामाजी की दुकान देख सकते हैं. कभी यहां एक व्यस्त बाजार हुआ करता था. मामाजी का ‘गल्ला’ (Cash Counter) भी बाजार की तरह हमेशा व्यस्त रहता था, जिस पर बचपन में हमारी निगाहें टिकी रहती थीं. इसी गल्ले के सहारे हमने बाजार में जलेबियों का भरपूर आनंद लिया है.
छुट्टियों में जब शहरों से लोग वापस लौटते हैं, तो मेरा गांव फिर से चहल-पहल का केंद्र बन जाता है. यहां की दोस्ती अनमोल है और रिश्तों में गजब की मधुरता है. उम्र के इस पड़ाव पर भी जब हम मिलते हैं, तो फिर से बचपन के रस में डूब जाते हैं.
सच कहूं तो, मेरे पहाड़ की वादियां ही मुझे ‘पहाड़ी’ बनाती हैं. मन इन्हीं में घुल जाने को करता है, और हवाओं से एक आवाज आती है—”हां, तू पहाड़ी है.”

पहाड़ की ऊंचाइयां हमें बूढ़ा नहीं होने देतीं, साहेब; इसकी सुंदरता हमारी महबूब है और हम इसके आशिक. जी जनाब, शहर से ‘संभावनाएं’ जुड़ी हैं, तो गांव से ‘भावनाएं’.
आधुनिक चकाचौंध से दूर मेरा गांव—सांसों (पट्टी-मवालस्यू, पौड़ी गढ़वाल)—आज भी पुरानी पारंपरिक जीवनशैली और प्राकृतिक सौंदर्य का गवाह है. आज इन यादों को साझा करते हुए ऐसा लग रहा है, मानो मैं फिर से अपने गांव की मिट्टी की सुगंध में लिपट गया हूं.
- बिपिन रावत | नॉएडा
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