50 के अक्षय में बहुत सिनेमा बाकी है

Akshay Kumar 50

अक्षय कुमार का हिंदी सिनेमा में प्रवेश संयोग ही था. दिल्ली के चांदनी चौक में बड़े हुए राजीव ओम भाटिया ने जब अपनी ऐड शूट के लिए बंगलोर की फ्लाइट मिस कर दी तो निराश होकर अपना पोर्टफोलियो पकड़े एक फिल्म स्टूडियो पहुंच गए.

उसी शाम उन्होंने अपनी पहली फिल्म दीदार साइन की. सौगंध और डांसर जैसी फिल्मों के बाद जब अक्षय कुमार की अब्बास मस्तान द्वारा निर्देशित फिल्म खिलाड़ी आई तो वह फिल्म अक्षय कुमार की पहली कारगर  फिल्म साबित हुई.

खिलाड़ी फिल्म इतनी हिट हुई कि अक्षय कुमार को साइन करने के लिए फिल्म निर्माताओं की लाइन लग गई. तब शुरू हुआ अक्षय कुमार की एक्शन फिल्मों का सिलसिला, इतना कि फिल्म इंडस्ट्री उन्हें एक्शन हीरो के नाम से जानने लगी.

खिलाड़ी का असर ऐसा हुआ कि 1992 से 2012 के बीच अक्षय कुमार ने कुल आठ ऐसी फिल्मों में काम किया जिसके शीर्षक में खिलाड़ी शब्द प्रयोग किया गया. यह फिल्में थीं, खिलाड़ीमैं खिलाड़ी तू अनाड़ीसबसे बड़ा खिलाड़ी, खिलाड़ियों का खिलाड़ीमिस्टर एंड मिसेज खिलाड़ीइंटरनेशनल खिलाड़ी , खिलाड़ी 420  और खिलाड़ी 786

खेलते-खेलते खिलाड़ी से सुपरस्टर बन बैठे

90 के दशक के अंत से अक्षय कुमार की एक्शन फिल्मों के साथ-साथ हास्यप्रधान फिल्मों का सिलसिला शुरू हुआ जिनमें हेरा फेरी और गरम मसाला को पसंद किया गया.

धीरे-धीरे इनकी फिल्मों ने बेतुकी कहानियां और फूहड़ हास्य का रुख लेना शुरू किया. इनमें से कुछ फिल्में थी हाउसफुलएंटरटेनमेंटचांदनी चौक टू चाइनाजोकरतीस मार खान और एक्शन रीप्ले

आजकल अक्षय कुमार की ‘राष्ट्रवादी’ फिल्मों का प्रचलन है. ये  हॉलिडे : अ सोल्जर इज नेवर ऑफ ड्यूटीबेबीएयरलिफ्ट और रुस्तम जैसी फिल्में कर दर्शकों में एक राष्ट्रीय अभिनेता के रूप में उभर रहे हैं.

आलम यह है कभी हांगकांग में वेटर का काम करने वाले अक्षय कुमार एक्शन, कॉमेडी और रोमांस किसी भी खांचे में फिट फिट बैठते हैं.

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