आर.वी.रमणी

r v ramani

डॉक्यूमेंट्री फिल्में आज नाम कमा रही हैं. लोग इन्हें देख रहे हैं, शेयर कर रहे हैं और इन पर चर्चाएं हो रही हैं. डॉक्युमेंट्री फिल्म निर्माण में आर.वी.रमणी एक ऐसा ही नाम हैं जिन्होंने असाधारण प्रयासों से बेहतरीन परिणाम दिए हैं. यही कारण है कि इन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिली है. 90 के दशक की शुरुआत में ही इनकी डॉक्युमेंट्री सा, फेस लाइक ए मैन और वन टू थ्री फोर ने ज़ोरदार दस्तक देकर दर्शकों को झकझोर दिया था. इनकी वेबसाइट www.ramanifilms.com पर आप विस्तार से इनकी फिल्मों के बारे में जान सकते हैं. रमणी से बात की श्रुति ने.

आपने मुंबई विश्वविद्यालय से भौतिकी का अध्ययन किया और फिर फिल्म एंड टीवी इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में शामिल हो गए. इस मन-बदलाव का क्या कारण था? क्या ये एक बदलाव था भी, या ऐसा कुछ था जिसे आप हमेशा करना चाहते थे?

कॉलेज के पहले साल से ही मेरे फोटोग्राफी के जुनून ने मुझे इसे एक पेशे के रूप में अपनाने की प्रेरणा दी. मेरे पास अन्य योजनाएं थीं, लेकिन यह ज्यादा सही लगा.

आपके लिए यह शुरुआत कैसी रही? आज आपके क्रेडिट में 20 से अधिक स्वतंत्र डॉक्युमेंट्री हैं. यह सफर तय करना आपके लिए कितना सरल या कितना कठिन रहा?

मैंने इसे कभी भी मुश्किल नहीं समझा. सच कहूं तो यह सफर हर तरह से बहुत ही उत्साहजनक रहा है.

डॉक्युमेंट्री बनाते वक्त क्या आपको कभी ऐसे अनुभव हुए जैसे कि आप किसी की निजी जगह अथवा ज़िन्दगी में दखलंदाजी करके अपने वृत्तचित्रों के माध्यम से उन्हें सार्वजनिक बना रहे हों? इन परिस्थितियों से आप कैसे निपटते हैं?

मैं घुसपैठ नहीं करता हूँ. मुझे केवल दिलचस्पी है, इसलिए कभी-कभी यह समझाना आवश्यक हो जाता है कि यह एक प्रक्रिया है. फिल्म निर्माण में पहुंच (ऐक्सेस) महत्वपूर्ण है. इसलिए इसे स्थापित करना ज़रुरी है. अगर कोई गलत समझता है, तो उसे समझाया जाना चाहिए. साथ ही कुछ वैकल्पिक तरीकों की तलाश में भी रहना होता है.

वृत्तचित्र स्वाभाविक और तथ्यात्मक माने जाते हैं. कितना मुश्किल होता है अपने कैमरे में स्वाभाविकता को कैद कर पाना? क्या कभी भी आपका कैमरा, किसी भी अर्थ में ऐसी बाधा बना है, जैसे कि आपको रिकॉर्ड करता देख लोग संदेह से घिर जाते हों?

यह एक बाधा कभी नहीं रहा है. हां, कई बार ऐसे हालात उत्पन्न हो जाया करते हैं, पर यदि आपका उद्देश्य स्पष्ट है तो इन चीजों को हल किया जा सकता है. मुख्य रूप से मुझे शूटिंग के बारे में आश्वस्त रह कर रिलैक्स करने की आवश्यकता होती है. उदाहरण के लिए सिक्यूरिटी गार्ड्स को ही ले लीजिए. सिक्यूरिटी गार्ड्स एक कैमरा को स्पाय मेकैनिज्म (गुप्तचर तंत्र) के रूप में देखते हैं. यह उनका काम है. इसी तरह अपना उद्देश्य स्पष्ट रखना मददगार होता है. अगर आपको एक सार्वजनिक प्रदर्शन को फिल्माने से रोका जाता है, तो आप अपने उद्देश्य को समझाने का प्रयास कर सकते हैं, या फिर बस आगे बढ़ें और शूट करें,  इस बात का ख़याल रखते हुए कि आप कितना जोखिम ले सकते है और किस प्रयोजन के लिए. मूल रूप से मैं लोगों की गोपनीयता का सम्मान करता हूं. फिल्मांकन के लिए, हर एक को सहयोग की जरूरत है जिसे व्यवस्थित करना होगा- प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से. यह काफी हद तक फिल्म की जरूरत पर निर्भर करता है.

क्या हर वृत्तचित्र बनाने का आपका एक अलग उद्देश्य होता है? जाहिर है, यह लोगों तक पहुंचने का एक बेहतरीन माध्यम है, पर क्या आपकी हर वृत्तचित्र के लिए कुछ अलग टारगेट ऑडियंस (लक्षित दर्शक) होते हैं?

नहीं, कोई टारगेट्स नहीं. मुझे ऐसा करना है क्योंकि मैं यह करना चाहता हूँ. मैं अक्सर मित्रों के बारे में सोचता हूँ कि अगर मैंने कुछ अच्छा किया तो उनसे शेयर करूंगा. मैं यह समझता हूँ कि अनिवार्य रूप से मेरी किसी फिल्म का कोई इंतज़ार नहीं कर रहा होगा. लेकिन यह मेरा निरंतर प्रयास होता है कि फिल्म की संभावनाओं को तलाशता रहूँ.

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श्रुति a seeker of truth... a lover of independence... a believer of individuality...

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