बेवकूफ हिन्दी दर्शक

मेरी यह समझ के बाहर है. मैं खुद हिन्दी भाषी हूँ और मुझे हिन्दी जानने समझने वालों की योग्यता पर कोई संदेह नहीं. लेकिन हिन्दी न्यूज चैनलों की खबरें देखकर लगता है वो अपने दर्शकों को बेवक़ूफ़ ही मानते हैं. और ऐसा करने में कोई चैनल पीछे नहीं है, सब एक से बढ़कर एक हैं.

किसी दिन मन लगाकर हिन्दी न्यूज चैनलों की प्रोग्रामिंग देखिए, किस अधकचरे तरीके से एपीसोड-पर-एपीसोड बनाकर दर्शकों को ऑनएयर तड़पने और तिलमिलाने के लिए छोड़ दिया जाता है.

एक चैनल आईएस चीफ बगदादी के गेमप्लान को समझाता हुआ दिख जाता है. बगदादी कितना खतरनाक है, बगदादी कैसे लोगों को मारता है, बगदादी कैसे अय्याशी करता है. आइए हम दिखाते हैं बगदादी की अय्याशी का महल. अरे ये क्या है, सीआईए और ब्रिटिश जासूसी एजेंसी एमआई15 से ज्यादा तेज हैं इस चैनल के जासूस. जब बगदादी के गेमप्लान पर अधकचरी स्क्रिप्ट खत्म हो गई तो दो चैनलों ने बगदादी के छोटे भाई की कहानी शुरू कर दी है.

कुछ चैनल अचानक भारत की रक्षा नीति पर रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान को दिखाते हुए शुरू कर देते हैं – अब नहीं बचेगा चीन. चीन को सबक सिखाएगा भारत. पीछे बैकग्राउंड में दस साल पुराने वीडियो गेम्स से उठाए गए लड़ाकू विमान तैरते रहते हैं.

एक चैनल तो रात के नौ बजे का बुलैटिन ही फैंटेसी लैंड से शुरू करता है. ईरान, चीन, पाकिस्तान सभी को भारत रात नौ बजे से दस बजे के बीच ही इतना सबक सिखा देता है कि सब माफी-माफी चिल्लाने लगते हैं.

एक चैनल बता रहा था कि कैसे विनाश युग आने वाला है. ये देखकर दूसरा ठीक नौ बजे शुरू हो गया कि कैसे भविष्य में तीन सेकेंड में वाशिंगटन और 30 मिनट में मंगल ग्रह पहुंच जाएंगे. सुना है नासा की एक पूरी टीम इस चैनल के वरिष्ठ संपादकों से मिलने आने वाली है. गुरु, ये टेक्नोलॉजी हमें दे दो.

कोई चैनल इससे बचा नहीं है. लेकिन अद्भुत बात ये है कि बगदादी के भाई और भविष्य के युद्ध और मंगल ग्रह तक सुपरयान पहुंचाने के बाद अगले ही क्षण इन चैनलों को भगवान शनि की पूजा के तरीके बताने में वक्त नहीं लगता. महिलाओं को सोलह श्रृंगार के तरीके, राहू केतु से बचने के उपाए भी यहीं मिलेंगे.

DD Kisan Channelआईआईएमसी में अध्यापन कार्य में संलग्न नदीम एस अख्तर सरकारी चैनल की दशा पर भी असंतोष व्यक्त करते हैं.

नदीम का कहना है कि किसान चैनल सरकार ने तो शुरु कर दिया है लेकिन किसान की स्टोरी, उनकी वेदनाएं न्यूज चैनलों की खबर का हिस्सा नहीं होतीं.

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अरुण पांडे गम से घबराना नहीं, ख़ुशी से इतराना नहीं. Liberal but with extreme views on social issues. Loves persons who have few complaints about system.