ईवीएम और कहां कहां हारेगा

ईवीएम पर दोष इसलिए भी मढ़ा जा रहा है क्योंकि कोई नेता अपनी हार पर चर्चा नहीं चाहता. तभी तो राजनीतिक दल इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के साथ छेड़छाड़ की आशंका दबने नहीं दे रही हैं. संसद में भी चुनाव सुधार चर्चा की आड़ में लगभग सभी हारी हुई पार्टियों ने अपनी बौखलाहट ईवीएम पर उतारी है. सबसे जबर्दश्त हार का सामना जिस पार्टी को करना पड़ा है, वो है समाजवादी पार्टी, जिसका उत्तर प्रदेश में सूपड़ा साफ हो गया. इसलिए राज्यसभा में सबसे आगे बढ़कर इसी पार्टी ने मामला उठाया. कांग्रेस सदस्य और राज्यसभा में विपक्षी नेता गुलाम नबी आजाद को साथ देना पड़ा क्योंकि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ कांग्रेस का गठजोड़ था.

कांग्रेस को पंजाब में भारी जीत मिली है और बीजेपी-शिरोमणि अकाली दल गठजोड़ का सूपड़ा साफ करके कांग्रेस की सरकार बनी है. यह दिलचस्प है कि पंजाब में कांग्रेस को ईवीएम छेड़छाड़ की आशंका नहीं है. लेकिन कांग्रेस को लगता है कि उत्तराखंड में गड़बड़ हुई है क्योंकि वहां कांग्रेस ऐसा हारी कि इसके मुख्यमंत्री हरीश रावत भी अपनी विधान सभा सीट नहीं बचा पाए. गोवा, मणिपुर विधान सभा चुनावों का नाम भी कांग्रेस नेता नहीं लेते क्योंकि वहां कांग्रेस को काफी सीट मिली. यह अलग बात है कि वहां सरकारें बीजेपी की बन गईं.

जानकारों के विश्लेषण को ध्यान से सुनें तो समझ आता है कि ईवीएम में छेड़छाड़ के बहाने मूक मशीनों को सियासी स्वार्थ का मुद्दा बनाया जा रहा है जो जनादेश के साथ खिलवाड़ लगता है. बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस से भी ज्यादा जोरदार तरीके से ईवीएम में गड़बड़ी का सवाल उठा रखा है. वामदलों का दौड़ में तो कहीं नामोनिशान नहीं था, लेकिन वाम मोर्चा सदस्य भी ईवीएम के खिलाफ कोरस में शामिल हो गए हैं. इसी बीच राज्यसभा में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सरकार की ओर से चुनाव आयोग का बचाव इस तरह किया मानो चुनाव आयोग कोई सरकारी संस्था हो.

ईवीएम छेड़छाड़ का मामला सबसे पहले पंजाब में आम आदमी पार्टी की हार के कारण दिल्ली के मुख्यमंत्री और पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने उठाया था. उनका साथ मायावती ने और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी दिया. अरविंद केजरीवाल पंजाब में अपनी पार्टी की सरकार बनाने का मंसूबा बांधे थे और मायावती उत्तर प्रदेश की पांचवीं बार मुख्यमंत्री बनने का ख्वाब देख रही थीं. अब देखिए आगे क्या होता है! आगे कई राज्यों में विधान सभा चुनाव होने हैं – गुजरात का नंबर पहले है, फिर 2018 में मध्य प्रदेश, कर्नाटक, त्रिपुरा, मेघालय में भी चुनाव होना है. 2019 में उड़ीसा विधान सभा का भी चुनाव है.

हां, मणिपुर की ‘लौह महिला’ इरोम शर्मिला अकेली नेता है, जिन्होंने रसूखदार पार्टियों के आगे करारी हार के लिए ईवीएम छेड़छाड़ को दोषी नहीं ठहराया है.

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एसडी खान हसरतें अभी और भी हैं...

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