दिल में तुम्हें बसा के

फोटो खींचने का मन करता है …और फिर शेयर करने में मज़ा आता है. सुकून मिलता है. कुछ भी खींचने में.

मैं रघु राय नहीं. ना ही उन फोटोग्राफर दोस्तों जैसा हूँ जो पेशे से फोटोग्राफर हैं और बेहतरीन तस्वीरें लेते हैं.

मोबाइल से फोटो खींचना आसान मेरा काम फोटो खींचना नहीं है. बस अच्छा लगता है, जैसे कवि गुरु रविन्द्र नाथ ठाकुर को बारिश में अपनी खिड़की से बाहर देखना अच्छा लगता था… पानी की बूंदों का हरे घास पर गिरना…

जीवन चलता जा रहा है. वक़्त रुकता नहीं. बस हमारे कैमरे कुछ पल को उतार लेते हैं, कभी भी गुनगुनाने के लिए उन तस्वीरों को देखने के लिए, देखते ही रहने के लिए… जब चाहे देखने के लिए, प्यार से, इत्मीनान से.

कुछ लोग सनकी होते हैं, उन्हें फोटो खींचना अच्छा नहीं लगता. एक बार एक पूजा में एक ऐसे ही उद्दंड मित्र ने मुझे झाड़ दिया, क्या फोटो ले रहे हो, हटो. तब से मैं उनकी फोटो नहीं खींचता. लेकिन, अभी बहुत फोटो खींचना बाकी है.

अब तो एक-पर-एक मोबाइल फोन आ गए हैं, जिनसे आप भी फोटो खींच सकते हैं.

फैशन डिज़ाइनर जेजे वलाया एक अच्छे फोटोग्राफर भी हैं. वे कहते हैं कुछ दिनों में डीएसएलआर की तरह ही फोटो क्वालिटी देने वाले मोबाइल फोन आ जाएंगे.

लेकिन, एक दर्द हमेशा मेरे मन में रहेगा… कि मैं अपनी परवीन बॉबी और ऑड्री हेपबर्न की फोटो कभी नहीं खींच पाऊंगा. वो मुझसे बहुत दूर चली गई हैं. उन्हें अपने कैमरे में कभी नहीं उतार पाऊंगा.

Gul Panag
गुल पनाग

बहरहाल, में कुछ भी खींचता रहता हूँ… जो कुछ दिख जाए…

एक एनालिस्ट मित्र हकान बक्काल्ब्सी कहते हैं, “जीवन में बहुत स्ट्रेस है, हर कदम पर तनाव है. क्यों न इनसे निजाद पाने की कोशिश फोटो खींचते हुए की जाए.”

मैं तो तनाव से दूर हूँ, ख़ुशी के करीब… फिर भी कम-से-कम एक फोटो हर रोज़ जरूर खींचता हूँ. दौड़ते, भागते चलते हुए… रूककर थोड़ा रेस्ट करना जरूरी है.

एक्टर-एक्टिविस्ट गुल पनाग हर रोज़ एक एल्फी लेती हैं – लिफ्ट में ली गई सेल्फी. उसे वे शेयर करती हैं अपने फैन के साथ.

तो क्यों न एक तस्वीर खींचने के लिए कुछ पल रुकें, देखें और खींचें.

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नीरज भूषण More than a bystander. Chocolate soldier. Pineapple lover. Roman Holiday movie fan.