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संसद | अफज़ल गुरु | फांसी

Who was Afzal Guruतो क्या अफज़ल का फांसी के तख्ते से कोई वादा था?

अफ़ज़ल दूसरे ऐसे कश्मीरी हैं जिन्हें अलगाववादी गतिविधियों के लिए फांसी पर लटकाया गया. उनसे पहले जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के नेता मक़बूल बट्ट को 1984 में दिल्ली के तिहाड़ जेल में ही फाँसी दी गई थी.

आश्चर्य की बात है कि अफ़ज़ल का जीवन शिक्षा, कला, कविता और चरमपंथ का अनूठा मिश्रण था.

Afzal Guru Biographyतो क्या अफ़ज़ल का आतंकी बनना एक दुर्भाग्य था? ग़ालिब की शायरी करने वाला और अपने बेटे का नाम भी ग़ालिब रखने वाला कैसे इस दुर्घटना का शिकार हुआ?

एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले सोपोर के आबगाह गाँव में झेलम नदी के किनारे बड़े हुए अफ़ज़ल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर परेड की अगुवाई करने के लिए विशेष रूप से चुने जाते थे.

क्षेत्रीय स्कूल से 1986 में मैट्रिक की परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने मुस्लिम एजुकेशन ट्रस्ट में दाख़िला लिया. उनकी मुलाक़ात भारत विरोधी गतिविधियों में सक्रिय लोगों से होती रही लेकिन अफ़ज़ल ने पढ़ाई को प्राथमिकता दी और 12वीं पास कर, मेडिकल कॉलेज में दाख़िला लिया और पिता के ख़्वाब को पूरा करने में जुट गए.

परन्तु एमबीबीएस के तीसरे साल में ही वे भारत विरोधी जम्मू-कश्मीर लिब्रेशन फ़्रंट में शामिल हो गए. अफ़ज़ल नियंत्रण रेखा के पार मुज़फ़्फ़राबाद में हथियारों के प्रशिक्षण के बाद वापस लौटे तो संगठन की सैन्य योजना बनाने वालों में भी शामिल हो गए.

परन्तु उनके विषय में यह कहा जाना कि वे ख़ून-ख़राबे को पसंद नहीं करते थे, कितना सही है! उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में भी प्रवेश लिया था और स्नातक के बाद अर्थशास्त्र में डिग्री ली. फिर बैंक ऑफ़ अमरीका में भी नौकरी की. खैर. उनकी  जिंदगी का चिराग तो बुझ गया. परन्तु क्या हम यह जान पायेंगे कि वास्तव में ऐसा क्या हुआ कि अफज़ल वादी से फांसी तक पहुँच गए!

संसद हमले के उपरांत हमने पाकिस्तान पर सीधा इलज़ाम लगाया था. तत्कालीन प्रधान मंत्री ने पाकिस्तान बार्डर पर तब युद्ध की तैयारियां भी कर ली थी. उसका क्या हुआ?

आने वाले समय में भी बहस जारी रहनी चाहिए कि अफज़ल को फांसी पर लटकाना कितना मुनासिब था, कितना कम था, कितना ज्यादा. अफज़ल का परिवार, उसका भाई, उसकी पत्नी और अबोध बेटा कश्मीर में रहते हैं. भारत बोलेगा उनके परिवार में शांति की उम्मीद करता है. अफज़ल की फांसी से जब कश्मीर की खतरनाक सच्चाईयों का एक और सच सामने आया है तब वक़्त है हम कश्मीर को स्वर्ग बनाने में पहल शुरू करें.

सोचने वाले सोचते रहे कि भारतीय संसद पर हमला आखिर किसने किया था? [पॉडकास्ट सुनें यहाँ क्लिक करें]

- नीरज भूषण | 13 फ़रवरी, 2013 | दिल्ली

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