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मोंसैंटो को बिहार किसानों का ठेंगा

बिहार के किसानों ने बहुराष्ट्रीय बीज कंपनी मोंसैंटो को अंगूठा दिखा दिया है. इसकी सूचना ‘जी.एम. मुक्त बिहार अभियान’ ने दी है. यह बताया गया है कि राज्य के किसानों ने अपने खेतों में मोंसैंटो को अपने बीजों का परीक्षण नहीं होने दिया है. गौरतलब है कि गैर सरकारी संगठन ‘तारा फाउन्डेशन’ के अंतर्गत ‘जी.एम. मुक्त बिहार अभियान’ चलाया जा रहा है. इसी क्रम में राष्ट्र्व्यापी किसान स्वराज यात्रा का कई पड़ाव भी बिहार में कई जगहों पर हुआ था.

राज्य किसान आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र नाथ वर्मा के अनुसार बिहार पहला ऐसा राज्य बना है जहां बी.टी. फसलों के व्यावसायीकरण पर रोक लगी है. उन्होंने ‘भारत बोलेगा’ को बताया कि केंद्र सरकार की जेनेटिक इंजीनियरिंग एप्राइजल कमिटी ने मोंसैंटो को देश में सात जगहों पर अपने बीजों के फिल्ड ट्रायल  की अनुमति दी थी, जिनमे बिहार के दो जगह प्रमुख हैं – बेगुसराय और भागलपुर. “देश में प्रथम जी.एम. खाद्य फसल के रूप में बी टी बैंगन की मंजूरी केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने के उपरान्त पूरे देश में इसका विरोध हुआ और फिर बी.टी. बैंगन पर रोक लग गयी. वह रोक भी मानव शरीर पर बी.टी. फसलों से होने वाले दुष्प्रभाव के कारण लगी थी. तब पुनः बी.टी. मक्का के रूप में जी.एम. खाद्य फसल के परीक्षण की क्या आवश्यकता आ पड़ी ?”

नियमों के मुताबिक, बीजों का खेतों में परीक्षण करने के पूर्व मोंसैंटो को पहले खुद को साबित करना अनिवार्य है परन्तु बिहार के किसानों में ‘जी.एम. मुक्त बिहार अभियान’ के जन-जागरण से मोंसैंटो को मुंह की खानी पड़ी है. भारत बोलेगा को पता चला है कि मोंसैंटो अपने जिन बीजों का परीक्षण करना चाहता है उसे विकसित राष्ट्र जैसे जर्मनी एवं फ़्रांस ने पहले हीं ठुकरा दिया है.

इन परिस्थितियों में मोंसैंटो को बिहार में कदम रखना भारी पड़ रहा है. ‘जी.एम. मुक्त बिहार अभियान’ के संयोजक एवं ‘जी.एम. फ्री इंडिया गठबंधन’ के सदस्य पंकज भूषण ने बताया कि खाद्य सुरक्षा, किसान हित, पर्यावरण सुरक्षा एवं बिहार की जनता के हित को ध्यान में रखते हुए किसी भी हालत में राज्य में मोंसैंटो या किसी भी अन्य कम्पनी को बी.टी. मक्का या कोई भी जी.एम. बीजों का फिल्ड ट्रायल नहीं करने दिया जायेगा.

भूषण के अनुसार पर्यावरण एवं मानव शरीर की सुरक्षा टॉप प्रायरिटी होनी चाहिए. “जी.एम. फसलों से पर्यावरण एवं मानव शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ता है. बिहार सरकार ने बी.टी. बैगन को राज्य में प्रतिबंधित कर एक मिसाल कायम किया था. इसी रूप में हम राज्य सरकार से अनुरोध करते हैं कि ऐसे परीक्षण को राज्य में बिलकुल प्रतिबंधित किया जाए. वैसे भी कृषि राज्य का विषय है.”

भारतीय किसान यूनियन के बिहार राज्य के प्रांतीय अध्यक्ष रामानुज सिंह के अनुसार पूरे देश में ऐसे जी.एम. बीजों के परीक्षणों का भारतीय किसान यूनियन कड़ा विरोध कर रहा है. इनका कहना है कि मोंसैंटो जैसी अमेरिका की  कंपनी आज पूरे विश्व के बीजों पर अपना अधिकार जमाना चाहती है और ऐसे बीजों के लाने के बाद किसानों के परम्परागत बीज स्वतः लुप्त होते चले जायेंगे और इन कंपनियों का अधिपत्य होता चला जायेगा क्योंकि इन बीजों से पुनः बीज पैदा नहीं हो सकते हैं. नतीजतन किसानों को हर समय बाजार से इन कंपनियों का ही बीज खरीदने पर विवश होना पड़ेगा. “ऐसे बीज मानव शरीर के लिए मीठा जहर के सामान है, अतः बिहार सरकार को ऐसे परीक्षण तुरंत रोकने चाहिये जिसमे राज्य के किसानों का भला हो सके.”

बिहार के कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह का तो मानना है कि राज्य में किसानों को जैविक खेती पर ध्यान देना चाहिए और जहरीले रासायनिक खादों का भी परित्याग करना चाहिए. क्लिक करें ► कृषि मंत्री वीडियो 

- प्रकाश बबलू | 8  मार्च 2011 | पटना

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3 Responses to "मोंसैंटो को बिहार किसानों का ठेंगा"

  1. shambhugoel says:

    In Bihar, a subsidy of some 200 plus crore has been announced in production of vermicompost organic fertilizer, over creation of its infra-structure and sale of the compost thus produced to the farmers.

    The Minister, Agriculture, Narendra Singh has said that use of chemical fertilizers should be abandoned and be substituted by organic fertilizers. Mr. Singh has rightly said this and in the days to come, I also pray that the same happens.

    But does this gospel truth require reproduction by any Minister, much less, from Mr. Narendra Singh? Everybody knows it. He had to say something and he has said something. Still amazing is a fact that such type of statements they form the headlines of newspapers.

    Anyway, I must tell you in advance that a large amount of money is lying sanctioned for this purpose, where Nitishji has very sincerely given a thought on organic farming and his efforts should be translated into reality in the days to come, but, beware, of a person who is stting there at the top of all these affairs, (not Nitishji), who may steal the show.

  2. Shambhu Goel says:

    बिहार राज्य साधू संतों,मनीषियो,स्वतंत्रता सेनानियों,educationists,महान क्रांतिकारियों ,की पृष्ठभूमि रही है |यह बात सच है लेकिन २० वी सदी के पूर्वार्ध तक के ऐसे महान विचारकों तक के लिए |१०-१५ वर्ष और जोड़े जा सकते है यानि १९६५-७० तक के नेताओं के बारे में |

    लेकिन आज अध्योपतन हो चूका है राजनेताओं और राजनीति का |

    कृषि विभाग ,बिहार की अगर बात करें तो बहु आयामी श्री नीतीशजी का सोच कृषि के उत्थान के लिए इनके सुझाये हुए रास्तों पर चल कर ,इनके अथक परिश्रम और इमानदारी से कृषि को बिहार या हिंदुस्तान ही नहीं बल्कि विश्व स्तर की उत्पादकता पर लाने का इनका बहुआयामी प्रयास आज बहुत ज्यादा दीखता और इसका रंग निखर कर और ज्यादा ऊपर आता |

    इनके विभाग से जुड़े हुए कुछ पदाधिकारी तथा राजनेता इसकी प्रखरता को धूमिल कर चुकें है |सुनने में आते रहता है की भारत सरकार के गठन में Political Compulsions के मद्देनज़र कुछ विवास्पद चरित्र के ही नहीं ,कुछ घोर चरित्रहीन राजनितिक दल के लोगों को शामिल कर के सरकार को कई मामलों में आम जनता के सामने नज़रें झुका कसर रखनी पड़ती है |

    लेकिन बिहार में इतना सशक्त गठबंधन और पूर्ण से भी आगे सम्पूर्ण बहुमत होने के बाद भी चरित्र वाले व्यक्तियों को दरकिनार कर महत्वपूर्ण मंत्रालयों को doubtful character के लोगों के हाथों में सौंपने की बाध्यता ,मुझे समझ में नहीं आ रही है |
    बिहार कृषि विभाग में एक वरिष्ठ भा.प्र.से. के अधिकारी को छोड़ कर ऐसा कोई भी पदाध्कारी नज़र नहीं आ रहा है जो सच्चे मायने में बिहार के कृषि को आगे ले जाना चाह रहा है |अकेला बचना भांड नहीं फोड सकता है |इस पदाधिकारी को राजनेताओं के दवाब में बहुत से अवांछनीय कार्य भूल से करने पड़ जाते हैं |इनको एक मोहरा बना कर जबरदस्त पैसों की वसूली की जाति है |

    नीतीशजी को यह समझ में क्यों नहीं आ रहा है यह बहुत ही खेदपूर्ण और अफ़सोस की बात है |

  3. Shambhu Goel says:

    What do you think the present company in governance in Bihar doing ?It is a repitition of Laloo Raaj where one single castemen were playing havoc with the electorate of the state ,it is now the same story with the changed characters (actors and actresses),they are the officers (IAS etal ),ministers (one Kumar and the other a kunwariji ).In agriculture department of Bihar it is a private limted company of Narendra Singh (Kumar/kunwar becuase of his caste ).They have made 25 crores in a recent purchase of DHAINCHA SEEDS meant for augmenting the humus content of the soils of the state by green-manuring .A triumvirate ,of this minster ,one IAS officer (I won,t name ),one Jaipuriar recently dethroned out of Bihar rajya Beez Nigam as an escape-goat although still a closest cohort of that superior IAS and this minster ,have however, set all the parameters right so as to prove their transparency , but fact is ,this seed was purchased at thrice the price they were available.There are many more scams ,if thorough probe is carried out will surely land these lords in hot water ,but our chief minister is a silent overseer to all these .I have written a tale of my sorrow brought about by this department through its minister,one IAS officer, one Deputy Director of Agriculture ,Sanjay Singh ,may kindly be read which will certainly prove to be an eye-opener for the conditions that the TODAY’s Bihar is reeling under :-
    महाशय ,

    मैं कम से कम दस बार माननीय मुख्य मंत्री जी के grievance cell में अपनी व्यथा के बारे में लिख चूका हूँ |

    हमारी एक औद्योगिक इकाई जिसका नाम हिमालय एग्रो केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड है विगत ३० सालों से कार्यरत थी |दिनांक १८.१२.२०१० से यह कारखाना कृषि विभाग ,बिहार द्वारा बंद करवाया जा चूका है |

    कृषि विभाग में कार्यरत एक पदाधिकारी जिसका नाम संजय सिंह है जिसकी मूल पदस्थापना कृषि विभाग के सांख्यिकी विभाग में है लेकिन इनको कतिपय कारणों से कृषि विभाग के राज्यस्तरीय उर्वरक कोषांग , का प्रभारी २००७ से ही बना दिया गया था जब श्री बी. राजेंद्र कृषि निदेशक थे |

    इनके अत्याचारों की कहानी इस प्रकार है :-

    १.इस कहानी की पहली कड़ी तो इसने २००७ में ही शुरू कर दी थी|

    २.कम शब्दों में कहना यह है की ९.०३.२०१० को ही हमलोगों ने (within specified time) अपने उर्वरक विनिर्माण और विपणन की अलग अलग अनुज्ञप्तियां के नवीनीकरण के लिए आवेदन कृषि विभाग को समर्पित कर दिया था|

    ३. २० मई २०१० को (करीब ७० दिनों पश्चात )कृषि निदेशक महोदय ने हमारे प्रतिष्ठान में स्थापित उर्वरक गुण विश्लेषण प्रयोगशाला की जांच करवाई |इस जांच दल में श्री बैद्यनाथ यादव ,तत्कालीन उप कृषि निदेशक (मीठापुर गुण नियंत्रण प्रयोगशाला ),श्री अशोक प्रसाद ,उप कृषि निदेशक (मुख्यालय ) थे |

    ४. इन लोगों ने अपने जांचोपरांत प्रतिवेदन में निम्नलिखित बातों को दर्शाया :-
    (क)प्रतिष्ठान में संचालित प्रयोगशाला में यन्त्र एवं उपकरण कार्यशील पाए गए |प्रयोगशाला में अपर्याप्त संख्या में यन्त्र और उपकरण पाया गया |प्रयोगशाला सीमित जांच सुविधा के साथ कार्यशील पाया गया |

    (ख)रसायनज्ञ कार्यरत है एवं उसे विश्लेषण कार्य की जानकारी है |

    (ग)विनिर्माण हेतु आधारभूत संरचना -उपलब्ध है तथा चालू हालत में है |

    ५.इसके अलावा यह भी कहा गया की प्रतिष्ठान में विनिर्माण इकाई में उत्पादित उर्वरक के प्रयोगशाला में गुणात्मक जांच सम्बन्धी अभिलेख आंकड़ा आदि संधारित नहीं पाया गया
    (ख)उर्वरक सम्बन्धी कच्चा माल स्थानीय थोक विक्रेता शिवनारायण चिरंजीलाल से मुख्य रूप से प्राप्त किये जाते हैं एवं उत्पादित उर्वरक का अधिक से अधिक हिस्सा इसी प्रतिष्ठान के माध्यम से बेचे जाते हैं |

    (ग)एन. पी. के.मिक्सचर विनिर्माण इकाइयों को कच्चा माल के रूप में उर्वरक आपूर्ति हेतु भारत सरकार से समय समय पर निर्गत निदेश और इससे सम्बंधित अद्यतन निदेश (२३०११ /१/२०१० -एम्.पी.आर. दिनांक ०४.०३.२०१० )जिससे वे अवगत हैं का अनुपालन नहीं किया जा रहा है |

    ६.इसी बीच दिनांक २०.०७.२०१० को कृषि निदेशक महोदय ने हमारा विनिर्माण / विपणन प्रमाण पत्र हेतु समर्पित आवेदनों को अस्वीकृत कर दिया और इस आदेश में यह भी दर्शाया की इस उनके आदेश के विरूद्ध ३० दिनों के अंदर हमलोग कृषि उत्पादन आयुक्त ,बिहार पटना के यहाँ अपील दायर कर सकते हैं |आदेश संख्या ८९८/२३.०७.२०१० .

    ७. हमलोगों ने विधिवत अपनी अपील कृषि उत्पादन आयुक्त महोदय के यहाँ समर्पित ३०.०७.२०१० को ही कर दी|

    ८.कृषि उत्पादन आयुक्त महोदय के यहाँ से ६० दिनों बाद अपील का आदेश प्राप्त हुआ जिसमे प्रमुख बातें इस प्रकार है :-

    “रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ,भारत सरकार के पत्र संख्या २३०११ दिनांक ४.०३.२०१० में यह स्पष्ट है की ‘manufacturers of custimsed fertilizers and mixture fertilizers will be eligible to source subsidised fertilizers from the manufacturers/importers after their receipt in the districts as input for manufacturing customised fertilisers and mixture fertilizers for agriculture purpose .’ इस पत्र से यह स्पष्ट होता है की मिश्रित उर्वरक विनिर्माताओं को अनुदानित उर्वरक उपयोग करना की अनुमति है |राज्य के लिए आवंटित अनुदानित उर्वरक की आपूर्ति manufacturers /importers द्वारा की जाती है ,जिसका वितरण थोक विक्रेता के माध्यम से किया जाता है |राज्य को आवंटित अनुदानित उर्वरक के कोटा में से ही मिश्रित उर्वरक विनिर्माताओं को उर्वरक उपलब्ध कराया जाना है |मिश्रित उर्वरक विनिर्माताओं की आवश्यकता की पूर्ति के लिए अगर अतिरिक्त अनुदानित उर्वरक की आवश्यकता हो तो उसकी मांग निदेशक ,कृषि रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ,भारत सरकार से कर सकते हैं |सभी पहलू पर विचार करते हुए यह आदेश दिया जाता है की तत्काल जिले के लिए आवंटित उर्वरक के कुछ प्रतिशत जिला कृषि पदाधिकारी मिश्रित उर्वरक विनिर्माताओं को उपलब्ध करायेंगे ,इस हेतु निदेशक ,कृषि सम्बंधित जिला कृषि पदाधिकारी को आवश्यक निदेश देंगे |

    ‘कृषि मंत्रालय की अधिसूचना दिनांक १६.०४.१९९१ में यह स्पष्ट किया गया है की सभी एन.पी.के. मिश्रण विनिर्माताओं को अधिसूचना में उल्लेख किये गए न्यूनतम उपकरण को प्रयोगशाला में रखना ही होगा |

    ‘सभी तथ्यों पर गंभीरता से विचार करते हुए यह आदेश दिया जाता है की अपीलकर्ता प्रयोगशाला में सभी न्यूनतम उपकरणों की व्यवस्था कर निदेशक ,कृषि को सूचित करेंगे |निदेशक,कृषि आवश्यक जांच कर संतुष्ट होने पर अपीलकर्ता के विनिर्माण प्रमाणपत्र को नवीकृत करेंगे |निदेशक,कृषि विनिर्माण प्रमाण पत्र निर्गत करते समय विपणन प्राधिकार पत्र के नवीकृत करने पर भी विचार करेंगे |’
    (N.B. :- this is verbatim replication of the order of APC,Bihar dated 30.09.2010 bearing no.4964.This order bears the signature of Sri K.C. Saha while he held the charge of APC when Sri A.K.sinha had gone on a long leave. )

    ९. ३०.०९.२०१० को ही हमलोगों ने अपने प्रयोगशाला में सभी अनावश्यक(जिस उपकरण का आज के परिवेश में कोई मान्यता नहीं रह जाती है जैसे chemical Balance in place of electronic digital balance) /आवश्यक उपकरणों की खरीद कर instal कर देने सम्बन्धी पत्र निदेशक कृषि को पत्र द्वारा सूचित कर दिया और इसकी एक प्रति कृषि उत्पादन आयुक्त महोदय को भी दे दी |

    १०.कृषि उत्पादन आयुक्त महोदय के इस आदेश को कतिपय कारणों से कृषि निदेशक महोदय को प्राप्त होने में काफी विलम्ब हुआ ,इसी कारण दिनांक २२.१०.२०१० को कृषि निदेशक महोदय के यहाँ से एक पत्र द्वारा त्रिसदस्सीय दल की गठन का आदेश निकला जिसको यह कहा गया की प्रतिष्ठान के प्रयोगशाला को पुनः जांच की जाये.|स्पष्ट है की कुछ सीढियों के अंतर पर ही ये दोनों कार्यालय नया सचिवालय ,पटना में है लेकिन” २२ “दिनों के बाद ही कृषि निदेशक महोदय प्रतिष्ठान के प्रयोगशाला सम्बन्धी जांच के आदेश दे पाए |

    ११. लेकिन यहाँ मात्र एक जांच सम्बन्धी आदेश को निकालने में २२ दिन लगे ,फिर २३.११.२०१०(याने इस जांच दल के गतःन होने के बाद ) को ही इस त्रिसदस्सीय जांच दल ने हमारे प्रतिष्ठान के प्रयोगशाळा की जांच की ,यानी एक महीने १ दिन बाद ही यह संभव हो पाया |स्पष्ट है की कृषि उत्पादन आयुक्त महोदय के आदेश के ५३ वे दिन बाद हमारी प्रयोगशाला की जांच हो पायी|

    १२.इस जांच प्रतिवेदन में जांच दल ने निष्कर्ष में प्रतिवेदित किया की :-
    “उर्वरक नियंत्रण आदेश १९८५ की धारा २१ (ए) के तहत उक्त प्रतिष्ठान के पास न्यूनतम प्रयोगशाला की सुविधा एवं उपरोक्त वर्णित उपकरण उपलब्ध हैं तथा उर्वरक नियंत्रण आदेश १९८५ की धारा २१ (ए) का पूर्ण रूपेण पालन किया गया है |अतः उक्त प्रतिष्ठान के विनिर्माण पंजीकरण प्रमाण पत्र को नवीकरण करने हेतु विचार किया जा सकता है|”(this is again an exact replication of the report of findings of the three member inspecting team which is dated 23.11.2010).

    १३.हमलोगों ने २.११.२०१० से अपने इकाई का उत्पादन शुरू कर दिया था|इस आशय की सूचना विधिवत कृषि निदेशक महोदय को दे दी गयी थी | उत्पादन शुरू करने के मुख्य तीन कारण थे जो इस प्रकार हैं:-

    (क) कृषि उत्पादन आयुक्त महोदय के आदेश के उपरांत कृषि निदेशालय द्वारा अनावश्यक विलम्ब हो रहा था ,फिर भी इस आदेश के १ महीने दो दिन बाद (यानी ३२ दिनों बाद )काफी इंतज़ार करने के बाद रबी सीजन के चालू हो जाने के आलोक में ,कृषकों के भी व्यापक हित में तथा मजदूर जो बहुत दिनों से बैठे हुए थे के कारण उत्पादन प्रारम्भ कृषि निदेशक को सूचित करते हुए कर दिया गया |
    (ख)कृषि उत्पादन आयुक्त महोदय के आदेश में यह दर्शाया गया है की “तत्काल जिले के लिए आवंटित उर्वरक के कुछ प्रतिशत जिला कृषि पदाधिकारी मिश्रित उर्वरक विनिर्माताओं को उपलब्ध कराएँगे “इससे यह स्पष्ट हो जाता है की उत्पादन चालु रखने के लिए ही ऐसे आदेश को पारित किया गया है |

    (ग)विनिर्माण और विपणन प्राधिकार पत्रों की नवीकरण का कृषि निदेशक महोदय द्वारा अस्वीकृत कर दिए जाने के उपरान्त कृषि उत्पादन आयुक्त के आदेश से अस्वीकृति का आदेश स्वतः विलोपित हो जाता है और उर्वरक नियंत्रण आदेश १९८५ की धारा १८(४) जो इस प्रकार है :- “where the application for renewal is made within the time specified in sub-clause (1)or sub-clause (3),the applicant shall be deemed to have held a vaid {certificate of manufacture}until such date as the registering authority passes order on application for renewal .”इसी तरह विपणन प्राधिकार पत्र के बारे में धारा ११(४) है .इन धाराओं के तहत हमलोगों ने उत्पादन शुरू किया जो हमारी महीनों से बंद पड़े प्लांट जो उर्वरक के कारण जंग खा रहा था ,कृषकों को रबी सीजन में संतुलित दानेदार की उपलब्धता को बनाये रखने के लिए तथा भूखमरी की समस्या से ग्रसित मजदूरों को त्राण दिलवाने की मंशा से ऐसा कदम उठा कर कोई पाप नहीं किया गया था |यह उद्योग विगत ३० वर्षों से स्थापित है और हमारी अनुज्ञप्तियों की नवीनीकरण की प्रक्रिया कम से कम दस बार विभाग द्वारा पूर्व में भी अपनाई गयी है |

    १४.दिनांक १८.१२.२०१० को कृषि निदेशक महोदय ने एक आदेश निकाला की (जो जिला कृषि पदाधिकारी,अररिया के नाम से प्रेषित था )”आपको आदेश दिया जाता है की में.हिमालय एग्रो केमिकल्स प्रा. ली. की फारविसगंज एवं पूर्णिया इकाई को पत्र प्राप्ति के साथ ही जांच कर लें एवं यदि विनिर्माण कार्य चालू रहने एवं उर्वरक विपणन का साक्षय पाया जाता है तो प्रतिष्ठान के प्रोपराइटर एवं प्रबंधन के विरूद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश १९८५ के खंड ७ एवं १२ का उल्लंघन करने के आरोप में आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा ७ के अंतर्गत साक्षय जुटाते हुए स्थानीय थाना में प्राथमिकी दर्ज कर दोनों संयंत्र को सील करने की त्वरित कार्रवाई करें|कृत कार्रवाईका प्रतिवेदन लौटती डाक से उपलब्ध कराया जाये|” इस सन्दर्भ में कृषि निदेशक का पत्र संख्या १४२७ दिनांक १५.१२.२०१० निर्गत हुआ है |

    १५.इसके उपरान्त दिनांक १८.१२ २०१० को जिला कृषि पदाधिकारी श्री बैद्यनाथ यादव ने परियोजना कार्यपालक पदाधिकारी ,फारविसगंज श्री मक्केश्वर पासवान को आदेश देकर १८.१२.२०१० को ही सील करवा दिया और दिनांक १९.१२.२०१० को फारविसगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज करवा दी गयी |दर्ज प्राथमिकी की भाषा इस प्रकार है :-“उपरोक्त विषय के सम्बन्ध में जिला कृषि पदाधिकारी ,अररिया के पत्रांक १०६५ दिनांक १८.१२ २०१० एवं कृषि निदेशक ,बिहार ,पटना के पत्र संख्या १४२७ दिनांक १५.१२.२०१० के द्वारा दिए गए निदेश के अनुपालन में में. हिमालय एग्रो केमिकल्स प्रा. ली. ,रानीगंज रोड ,फारविसगंज की जांच की गयी |जांच के समय फेक्ट्री बंद पायी गयी किन्तु भण्डार पंजी एवं वितरण पंजी के अवलोकन से ज्ञात होता है की फेक्ट्री में विनिर्माण कार्य कराया जाता रहा है |दिनांक १.१२.२०१० को मेरे द्वारा भण्डार पंजी एवं विक्री पंजी की जांच की गयी थी जिसमे विनिर्मित NPK धनवर्षा हरासोना १८:१८:१० भण्डार में कुल 105 of 50 kgs पाया गया था किन्तु दिनांक १८.१२.२०१० तक विनिर्मित NPK हरासोना १८:१८:१० ७४१५ बोरा ५०के.जी. विक्री दिखाया गया है इस प्रकार दिसंबर माह में कुल ७३१० बोरा ५० के.जी. का विनिर्माण में. हिमालय एग्रो केमिकल्स ,फारविसगंज द्वारा किया गया है जो उर्वरक नियंत्रण आदेश १९८५ के खंड (७)एवं (१२) का उल्लंघन किया गया है जो की गैर कानूनी और अवैध है |
    अतः में. हिमालय एग्रो केमिकल्स ,रानीगंज रोड ,फारविसगंज के द्वारा वगैर लाइसेंस नवीकरण कराये विनिर्माण इकाई में विनिर्माण एवं बिक्री करने के आरोप में प्रतिष्ठान के प्रबंधक सह प्रबंध निदेशक श्री शम्भू गोयल पिता ओंकार मल अग्रवाल छुआ पट्टी रोड वार्ड न. १७ नगर परिषद ,फारविसगंज के विरूद्ध प्रथ्मिनकी दर्ज की जाती है”|यह कार्य दिनांक १९.१२.२०१० को करवाया जाता है |
    १६.इसी तरह हमारे पूर्णिया इकाई को भी बंद करवा दिया जाता है और १९.१२.२०१० को ही प्राथमिकी दर्ज कर दी गयी |
    १७ कृषि निदेशालय में अनावश्यक विलम्ब हो रहा था इसका प्रमाण ऊपर अंकित विभिन्न तिथियों से स्वतः ज्ञात हो सकता है |संजय सिंह द्वारा इनकी बदनीयती से सृजित कथा का अंत यहीं नहीं होता है |हमलोगों ने इनलोगों के द्वारा अपनाई गयी प्रताड़ित करने की प्रक्रिया को देखते हुए माननीय उच्च न्यायालय में एक writ petition भी दिया था ,संजोग से जिसकी सुनवाई २०.१२.२०१० को हो गयी और उच्च न्यायलय द्वारा आदेश जो दिया गया वो इस प्रकार है :
    CWJC NO.20251 of 2010 :- “From the facts and circustances of this case , is quite apprent that the matter for renewal of Certificate of Registration for manufacturing and sale of Mixture of Fertilizers is pending before the Director,Agriculture ,Government of Bihar since 30.09.2010 when order passed by the Agriculture Production Commissioner ,Bihar in Appeal no. 7 of 2010 was communicated.
    3.Let the said matter be considered and disposed of by the Director,Agriculture within aperiod of three weeks from the date of receipt/production of a copy of this order.It may be noted that violation of this order shall entail serious consequences and will be deemed as contempt of court and this court shall be constrained to take actions against the contemnor .
    4.A copyof this order be handed over to Government Advocate IV for proper compliance of this order.”

    १८.हाई कोर्ट के इस आदेश के विभाग में पहुँचने के बाद महज एक खानापूर्ति करने के लिए दिनांक २७.१२.२०१० को एक पत्र जिसका पत्रांक १४७० दिनांक २७.१२.२०१० कृषि निदेशालय से हमारे नाम से स्पष्टीकरण मांगने के लिए प्रेषित किया जाता है जो इस प्रकार है :-
    “उपर्युक्त विषयक कहना है की कृषि उत्पादन आयुक्त के आदेश ज्ञापांक ४९६४ दिनांक ३०.०९.२०१० के आलोक में आपके प्रतिष्ठान के NPK मिश्रण विनिर्माण प्रमाण पत्र एवं विपणन प्राधिकार पत्र के नवीकरण की कार्रवाई प्रक्रियाधीन थी|इस बीच आपने अपने पत्र संख्या HAC –OUTLET CMD/10/235/01 दिनांक 22.11.2010 के द्वारा सूचित किया है की आपके द्वारा NPK मिश्रण का विनिर्माण कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है |आप अवगत हैं की बिना विनिर्माण प्रमाण पत्र विनिर्माण कार्य करना उर्वरक नियंत्रण आदेश १९८५ के खंड १२ का उल्लंघन है|आपके द्वारा बिना विनिर्माण प्रमाण पत्र प्राप्त किया ही विनिर्माण कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है जो उर्वरक नियंत्रण आदेश १९८५ के खंड १२ का उल्लंघन है और आपका कृत उर्वरक नियंत्रण आदेश के विरूद्ध है तथा गैर कानूनी है |

    अतः आप स्पष्ट करें की उपरोक्त आरोप के आलोक में क्यों नहीं आपके प्रतिष्ठान का विनिर्माण प्रमाण पत्र एवं विपणन प्राधिकार पत्र के नवीकरण हेतु आपसे प्राप्त आवेदन को उर्वरक नियंत्रण आदेश के खाद १८(२) के अंतर्गत अस्वीकृत कर दिया जाए |आप अपना स्पष्टीकरण दिनांक ०३.०१.२०११ तक अवश्य समर्पित करें अन्यथा एकतरफा निर्णय ले लिया जाएगा “ |
    (N.B. विभाग द्वारा स्वयं ही यह स्वीकार किया जा रहा है की हमारे मिश्रण विनिर्माण प्रमाण पत्र एवं विपणन प्राधिकार पत्र के “नवीकरण “की कार्रवाई प्रक्रियाधीन थी |तब हमपर क्या नवीकरण की धाराओं के उल्लंघन में आरोप लगाना उचित होगा या की नए अनुज्ञप्ति पंजीकरण की धाराओं के उल्लंघन का आरोप लगाना कहाँ तक उचित होता है |ऐसे भी यह एक गहन चिंता का विषय है की प्राथमिकी दर्ज करवाने के निमित्त पत्र में खंड १२ और ७ के उल्लंघन का उल्लेख है जबकि स्पष्टीकरण में खंड १८(२) के उल्लंघन का आरोप भी लगाया जा रहा है |
    एक सोची समझी हुई बदनीयती की तहत एक साजिश कर के प्राथमिकी के उपरान्त स्पष्टीकरण पूछने का एक ही तात्पर्य है की जिससे उच्च न्यायालय को पुख्ता जवाब दिया जा सके |ऐसे प्राथमिकी हो जाने के बाद ऐसे स्पष्टीकरण को कोई औचित्य ही नहीं रह जाता है |
    संजय सिंह की मंशा तो शुरू से ही थी की रु. १० लाख मिलने के बाद ही नवीकरण किया जाएगा |यह गैर कानूनी उगाही न होते देख इस व्यक्ति ने अपनी सारी ताकत झोंक कर और एक खास बेईमानी की नियत से न सिर्फ विभाग का समय बर्बाद करवाया है ,इसके साथ सैकड़ों मजदूरों को भी बेरोजगार कर दिया है ,लाखों रुपैये की खाद को पानी में परिवर्तित होकर बह जाने की खास कोशिश की है |हमारी बर्बादी करना तो इसके जेहन में २००७ से समा गयी थी जब यह व्यक्ति उल्टा सीधा आदेश डा. बी. राजेंद्र जी से करवाना शुरू कर दिया था |पर बिहार में भारतीय प्रशासनिक सेवा के ऐसे पदाधिकारी उल्टा सीधा आदेश देते ही रहते हैं जिससे इनका प्रभुत्व कायम रहे ,भले ही जनता का नुकसान होते रहे ,कम से कम कोर्ट कचहरी के चक्कर में समय तो बर्बाद ये पदाधिकारी करवा ही देते हैं और इसी में इनको दीखता है अपना बांकपन ,अपनी शक्ति |इन लोगों को यह भी शर्म नही है की कोर्ट के आदेश किस कदर इनके मुहं पर तमाचा लगाते है |कोर्ट ने इनके और एक खास कृषि उत्पादन आयुक्त के ऐसे ही आदेश के विरूद्ध एक अन्य मामले में जो हमारे मामले से हूबहू मिलता जुलता है में टिप्पणी की थी वो इस प्रकार है :- CWJC 16645 of 2010 order dated 1.10.2010 – “It is evident from the impugned order that they suffer from non-application of mind to the requirements of the Fertilizer Control Order not only with respect to the facts of the case but also the requirement of law .
    “Once the petitioner had taken the stand that shortage of equipments in the laboratory was rectified,either the respondent authorities ought have accepted the same or they could have made inspection of the Laboratory to verify the statements made and thereafter appropriate orders should have been passed keeping in view the valuable rights of the petitioner involved in the matter .
    “On consideration of the entire facts and circumstances the order dated 4.06.2010 of the Director,Agriculture and 13.09.2010 of the Agriculture Production Commissioner are set aside and the matter is remanded to the Director ,Agriculture to consider the question of renewal of the registration certificate of the petitioner in accordance with law after considering the documents submitted by the petitioner and,if necessary by getting the inspection of the petitioner’s laboratory done by a team of competent Officers .

    “Let the application for renewal of the petioner be considered and disposed of within a period of three weeks from the date of receipt /production of a copy of this order.

    The writ petition is disposed of with the afore said observations and directions .”

    Sd/- Ramesh Kumar Dutta ,J.
    लेकिन शर्म तो इन प्रशासनिक पदाधिकारियों ने एक दानवी हैवान के पहलू में गिरवी रख दी है |इसका एक खास कारण यह भी है की ऐसे पदाधिकारिओं का मान बढ़ता है चोर और सिरफिरे राजनीतिज्ञों का प्रश्रय मिलने पर |और कम से कम आज के कृषि विभाग में ऐसा ही हो रहा है |

    १९.दिनांक २०.१२.२०१० के उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार हमारे अनुज्ञप्ति नवीकरण को नहीं करके कृषि निदेशक ने आदेश संख्या २५ दिनांक ७.०१.२०११ को हमारे आवेदन को पुनः अस्वीकृत कर दिया वह भी जब उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया था की “matter for renewal of certificate of Registration for manufacture and sale of Mixture of fertilizers is pending before the Director,Agriculture ,Government of Bihar since 30.09.2010 when order passed by Agriculture Production Commissioner,Bihar in appeal no. 7 of 2010 was communicated “.

    कृषि निदेशक ने इस मद में एक आदेश निकाला जो दिनांक ६.०१.२०११ को दस्तखत किया गया और वह इस प्रकार है :-
    प्वाइंट नो. ६ .”प्रतिष्ठान से प्राप्त स्पस्टीकरण संतोषप्रद एवं स्वीकार्य नहीं है |प्रतिष्ठान की ओर से प्राप्त स्पस्टीकरण से स्पस्ट होता है की उनके द्वारा उर्वरक नियंत्रण आदेश १९८५ के खंड १८(४)एवं ११(४)के अंतर्गत प्रतिष्ठान के विनिर्माण एवं विपणन प्राधिकार पत्र को वैध माना गया है |इस सम्बन्ध में उक्त दोनों खण्डों का उल्लेख करना समीचीन प्रतीत होता है |खंड १८(४) निम्नवत है :-
    “where the application for renewal is made within the time specified in sub-clause (1)or sub-clause (3),the applicant shall be deemed to have held a valid certificate of manufacture until such date as the registering authority passes order on application for renewal “
    तथा ११(४) निम्नवत है :-
    “where the application for renewal of certificate of registration is made within the time specified in sub-clause (1)or sub-clause (3),the applicant shall be deemed to have held a valid certificate of registration until such date as the controller passes order on application for renewal”

    उपरोक्त दोनों खण्डों के अवलोकन से स्पष्ट है की नवीकरण हेतु लंबित विनिर्माण प्रमाण पत्र एवं विपणन प्राधिकार पत्र उस अवधि तक वैध है जब तक की पंजीकरण पदाधिकारी के द्वारा आदेश पारित नहीं कर दिया जाय |में. हिमालय एग्रो केमिकल्स प्रा. ली. के मामले में प्रतिष्ठान का नवीकरण हेतु प्राप्त आवेदन अद्योहसताक्षरी के आदेश दिनांक २३.०७.१० के द्वारा अस्वीकृत किया जा चूका है |अतः उर्वरक नियत्रण आदेश १९८५ के खंड १८(४) एवं ११(४) के अनुसार दिनांक २३.०७.२०१० को प्रतिष्ठान के विनिर्माण प्रमाण पत्र एवं विपणन प्राधिकार पत्र की वैधता समाप्त हो चुकी है |
    प्वाइंट न..७ :-कृषि उत्पादन आयुक्त के द्वारा अपील -७/२०१० में पारित आदेश में कृषि निदेशक को निदेश दिया गया था की अपीलकर्ता के प्रयोगशाला में सभी न्यूनतम उपकरणों की जांच कर संतुष्ट होने पर अपीलकर्ता के विनिर्माण प्रमाण पत्र को नवीकृत करेंगे एवं इसे निर्गत करते समत विपणन प्राधिकार पत्र को नवीकृत करने पर विचार करेंगे |अपिलवाद के दिए गये आदेश के आलोक में प्रयोगशाला की सुविधा की जांच कर अग्रेतर कार्रवाही की जा रही थी |परन्तु इसी बीच में हिमालय एग्रो केमिकल्स प्रा. ली. के द्वारा अनाधिकृत रूप से विनिर्माण एवं विपणन कार्य प्रारम्भ कर दिया गया जबकि अध्योहस्ताक्षरी के द्वारा कृषि निदेशालय के ज्ञापांक ८९८ दिनांक २३.०७.२०१० को संशोधन करने सम्बन्धी कोई भी आदेश निर्गत नहीं किया गया |इस परिस्थति में में. हिमालय एग्रो केमिकल्स प्रा.ली. के द्वारा किया गया विनिर्माण एवं विपणन कार्य बिना विनिर्माण प्रमाण पत्र एवं विपणन प्राधिकार पत्र प्राप्त किये किया गया है जो उर्वरक नियंत्रण आदेश १९८५ क्र खंड १२ एवं ७ का उल्लंघन है एवं जिसके लिए प्रतिष्ठान के विरूद्ध के. हाट थाना, पूर्णिया एवं फारविसगंज थाना ,अररिया में प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है |

    प्वाइंट न. ८ :-उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है की में. हिमालय एग्रो केमिकल्स प्रा. ली. के द्वारा विनिर्माण प्रमाण पत्र एवं विपणन प्राधिकार पत्र के बिना उर्वरक मिश्रण का विनिर्माण एवं विपणन कार्य कर उर्वरक नियंत्रण आदेश १९८५ के खंड १२ एवं ७ का उल्लंघन किया गया है |प्रतिष्ठान के द्वारा उर्वरक नियंत्रण आदेश के उपरोक्त खंड को उल्लंघन करने के आरोप में दिनांक ३०.०९.२०१० को में. हिमालय एग्रो केमिकल्स प्रा. ली. के द्वारा समर्पित विनिर्माण एवं विपणन प्राधिकार पत्र के नवीकरण हेतु आवेदन को अस्वीकृत किया जाता है |”

    N.B. कृषि निदेशक के इस आदेश से निम्न बातें साफ़-साफ़ स्पष्ट हो जाती हैं:-
    (क)हिमालय एग्रो केमिकल्स के इस मामले में उर्वरक नियंत्रण आदेश १९८५ के तहत खंड १२ एवं खंड ७ ही लागू होगा न की खंड १८(४) एवं ११(४)
    (ख)कृषि निदेशालय के उपर्वर्नित पत्राचार से यह भी साफ़ हो जाता है की यह मामला नवीकरण का न होकर नए अनुज्ञप्ति पंजीकरण का ही होगा | जबकि यह भी सत्य है की यह फेक्ट्री विगत ३० वर्षों से कार्यरत है और १० बार इसकी अनुज्ञप्तियों का नवीकरण हो चूका है |इसका मतलब सीधा है की कृषि निदेशालय के अनुसार इन अनुज्ञप्तियों का स्वतः deregistration हो चुका है |भविष्य में हमारा पंजीकरण नए रूप में हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता है |होगा तभी जब इन लोगों को हम विधाता माने और इनकी पूजा अर्चना करें|
    (ग) यह भी साफ़ हो जाता है की कृषि निदेशालय में कृषि निदेशक श्री अरविंदर सिंह और संजय सिंह के मन में जो आएगा वो ये करेंगे और न उच्च न्यायालय का कोई आदेश इन लोगों पर लागू होता और न ही कृषि उत्पादन आयुक्त का, क्योंकि कृषि उत्पादन आयुक्त महोदय के आदेश के बाद हमारी प्रयोगशाला में निर्धारित उपकरणों की व्यवस्था कर ली गयी है जिसकी सूचना हमलोगों ने ३०.०९.२०१० को ही दे दी थी,इनलोगों ने इस आदेश के ५३ वे दिन बाद ही हमारे प्रयोगशाला को जांच करवाया |
    (घ)इतना ही नहीं प्रयोगशाला के जांचोपरांत दिनांक २३.११,२०१० को जोविभाग द्वारा सम्भव हो पाया ,इस जांच प्रतिवेदन में साफ़ –साफ़ यह प्रतिवेदित है की उर्वरक नियंत्रण आदेश १९८५ की धारा २१(ए) का प्रतिष्ठान द्वारा पूर्णरूपेण पालन कर लिया गया है ,के बाद भी २३ दिन बीत जाने के बाद याने १८.१२.२०१० तक भी नवीकरण करने की कोई प्रक्रिया सिर्फ विचाराधीन थी या यह कहा जाए की हमलोगों पर प्राथमिकी दर्ज और संयंत्र को सील करवाने की प्रक्रिया करने की जुगत में इन २३ दिनों में ये दोनों महानुभाव लगे हुए थे और अंततःइनलोगों ने एक हैवानियत का उदहारण देते हुए हमलोगों पर प्राथमिकी और संयंत्र को सील करवाने की प्रक्रिया को अंजाम दे ही दिया |यह है सुशासन |
    (ङ)यह भी स्पष्ट हो जाता है की इनलोगों पर कोई अंकुश नहीं है ,ये लोग अपने आप में एक सरकार है ,क्योंकि हमारी तरफ से दसियों बार कृषि उत्पादन आयुक्त महोदय को इनके इतने असाधारण विलम्ब की सारी कारगुजारियों से अवगत करवाया जा चूका था तथा कृषि मंत्री महोदय को भी मैं स्वयं मिल कर इन कारनामों के बारे में कहा था|यह बतला देना यहाँ आवश्यक है की कृषि मंत्री महोदय से जब हमलोग मिलने गए तो कृषि मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह जी द्वारा यह कहा गया की “ये लोग(हमलोगों के बारे में) दो नंबर के आदमी हैं “ और विभाग ने कोई गलती नहीं की है |यह तो समय बताएगा की दो नंबर के लोग कौन हैं ,सिर्फ अपने NUISANCE VALUE के कारण कोई मंत्री पद प्राप्त कर लेता है तो वह आदमी स्वत एक नंबर का सदाचारी इंसान नहीं हो जाता , न ही ऐसे व्यक्ति को मंत्री पद प्राप्त होने के बाद यह कहने का हक मिल जाता है की वह किसी भी उद्यमी को दो नंबर का आदमी कहे |यह भी अत्यावश्यक है की अभी तक माननीय स्वर्गीय श्री अभय सिंह ,दिवंगत सदस्य ,बिहार विधान सभा ,के रहस्मयी मौत के बारे में अभी पर्दा उठाना बांकी है ,और सुशासन की पुरजोर कोशिश भी यही है की इस रहस्य को रहस्य बने रहने देना और जनता की स्मृति से जब यह बात विलुप्त हो जायेगी तब इस रहस्य को दफना देना है ,खास बात तो यह है की मंत्री महोदय के अपने चरित्र से ही नहीं अपनी सारी सांसारिक काया से दो नंबर की बू आती है और श्री अभय सिंह इन्ही के ज्येष्ठ पुत्र भी हैं|चना ,मसूर और खास कर ढैंचा बीज के खरीद में घोटाले का रहस्योदघाटन होना बांकी है |इन बीजों की खरीद में करोड़ों रूपैयों का घोटाला हुआ है जिसमे शीर्ष स्तर के राजनीतिग्य और पदाधिकारियों की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता है |
    (च)कृषि निदेशालय के संजय सिंह के हैवानियत,निरंकुशता और बेशर्मियत का एक खास कारण यह भी है की कृषि उत्पादन आयुक्त महोदय के पद पर जिन्होनें रह कर हमारी सुनवाई की थी उनका नाम श्री के. सी. साहा है जो मात्र १५ से २० दिनों के लिए कृषि उत्पादन आयुक्त के रूप में इस कार्यभार को देख रहे थे |लेकिन श्री ए. के. सिन्हा जी के १५ से २० दिनों के अवकाश के बाद पुनः इन्होनें कृषि उत्पादन आयुक्त का प्रभार ग्रहण कर लिया |यह भी यहाँ बतला देना आवश्यक है की श्री ए.के.सिन्हा जी ने हमारे अपील को दो महीने तक टाला और कम से कम इन दो महीनों में ४ बार सुनवाई की तारीख को adjournment for next date करते रहे|इन्होनेंस्वयं अवकाश पर जाने के पहले अंतिम तारीख २९.०९.२०१० दी थी लेकिन ये २३.०९.२०१० से ही अवकाश पर चले गए थे |चूँकि श्री के.सी. साहा साहब कृषि उत्पाफ्दन आयुक्त के पदभार से मुक्त हो गए, तब संजय सिंह को congenial atmosphere मिल गया अपनी हैवानियत को मूर्त रूप देने में|इस बारे में की congenial atmosphere कैसे और क्यों बन गया , मेरे से ज्यादा आप समझ सकते हैं ,मुझे बतलाने की आवश्यकता नहीं है |
    हमारे विरूद्ध यह चक्व्यूह की संरचना में संजय सिंह जो अत्यंत दम्भी व्यक्ति है का हाथ है और सब से ज्यादा हैरानी की बात तो यह है की कुछ भा.प्र.से. के पदाधिकारी अपने आप में जब अपने आप को एक सरकार मान लेते हैं तो उनके आचरण और कार्यशैली से आम जनता पर क्या प्रभाव पड़ेगा ,वो जान बुझ कर अनभिग्य बने रहते हैं ऐसे निरंकुश कारनामों से वही आम जन दर दर की ठोकर,कोर्ट से विभाग,विभाग से कोर्ट फिरता रहता है ,और इसी से जन्म लेता है माओवाद, नक्सलवाद , और फिर सुशासन के तहत इस आम जन को सुशासित करने के लिए सुशासन के बाबुओं को एक सुसज्जित सेना का सहारा लेना पड़ता है | वाह रे !आपका सुशासन नितीश बाबु |
    २०. हैवानियत और निरंकुशता के साथ साथ उच्च न्यायालय के आदेश की अवमाननना का डर की एक कहानी जिसका रचयिता यही संजय सिंह है वो भी सुन लीजिए | कृषि निदेशालय से निर्गत कृषि निदेशक ,बिहार ने बिहार एग्रो इंडस्टीज,फारविसगंज (यह प्रतिष्ठान भी विगत ३५ वर्षों से कार्यरत है और दानेदार मिश्रित उर्वरक का उत्पादन करता है )को एक पत्र लिखा जो इस प्रकार है :-

    प्रेषक , पत्र संख्या १३२१ /२२.११.२०१०
    अरविंदर सिंह ,भा.व्.से.,
    कृषि निदेशक,बिहार |
    सेवामें ,
    जिला कृषि पदाधिकारी ,
    अररिया |

    विषय :- में. बिहार एग्रो इंडस्ट्रीज,फारविसगंज के द्वारा पुनः उत्पादन कार्य शुरू किये जाने के सम्बन्ध में |

    महाशय ,
    उपर्युक्त विषयक प्रसंग में कहना है की में.बिहार एग्रो इंडस्ट्रीज ,फारविसगंज ने CWJC16645/10 में पारित न्यायादेश के आलोक में पुनः उत्पादन कार्य शुरू करने की सूचना दी है |न्यायादेश के आलोक में प्रयोगशाला सुविधा की जांच की प्रक्रिया की जा रही है |कृषि निदेशालय से तदोपरांत समुचित आदेश पारित किया जाएगा |कृषि निदेशक के द्वारा जब तक विनिर्माण प्रमाण पत्र का नवीकरण नहीं किया जाता है तब तक विनिर्माण कार प्रारम्भ करना उर्वरक नियंत्रण आदेश १९८५ के खंड १८ का उल्लंघन है और गैरकानूनी है|
    आप अपने स्तर से जांच कर न्यायसंगत कार्रवाई करना सुनिश्चित करें |
    ह. अरविंदर सिंह दिनांक २२.११.२०१० (मो. न. ९४३१८१८७०४)

    २१. बिहार एग्रो इंडस्ट्रीज ,फारविसगंज के मामले में जिला कृषि पदाधिकारी ,अररिया श्री बैद्यनाथ यादव ने दिनांक १०.१२.२०१० को पत्र संख्या १०३८ से परियोजना कार्यपालक पदाधिकारी अररिया को संबोधित करते हुए लिखा जो इस प्रकार है :-

    विषय :-मेसर्स बिहार एग्रो एजेंसीज ,फारविसगंज द्वारा कृषि निदेशक,बिहार,पटना के पत्र संख्या १३२१ दिनांक २२.११.२०१० में निहित निदेश का उल्लंघन कर पुनः उत्पादन कार्य प्रारंभ करने के सम्बन्ध में |
    प्रसंग:कृषि निदेशक, बिहार ,पटना का पत्र संख्या १३२१ दिनांक २२.११.२०१० |

    महाशय ,
    उपर्युक्त विषय के सम्बन्ध में कहना है की इस कार्यालय के पत्र संख्या १००२ दिनांक ३०.११.२०१० द्वारा आपको उपरोक्त निर्माता कंपनी को जांच करने का निदेश दिया गया था |
    कृषि निदेशक,बिहार पटना के विषय अंकित पत्र जिसकी प्रति विनिर्माता इकाई को भी दी गयी है में निहित निदेश की उन्हें विनिर्माण प्रमाण पत्र का नवीकरण होने तक ,विनिर्माण कार्य पुनः आरम्भ नहीं करना है ,ऐसा करने से उर्वरक नियंत्रण आदेश १९८५ का खंड (१८) का उल्लंघन होगा एवं गैरकानूनी भी है |
    कृषि निदेशक,बिहार पटना के इस निदेश के बाउजूद भी सम्बंधित विनिर्माता कंपनी के द्वारा उर्वरक नियंत्रण आदेश का उल्लंघन कर विनिर्माण कार्य किया जा रहा है |
    अतः आपको निदेश दिया जाता है की अविलम्ब निम्नांकित कार्रवाई करना सुनिश्चित करें:-
    (i)विनिर्माण इकाई में विनिर्माण कार्य में रोक लगा दें |
    (ii)विनिर्मित सामग्री एवं कच्चा माल का जब्ती सूची तैयार कर निर्मित सामग्री का नमूना संग्रह कर प्रयोगशाला में भेजें |
    (iii)कच्चा माल कहाँ से प्राप्त किया गया है उसका स्त्रोत्र प्राप्त कर साक्षय तैयार

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